सागौन / सागवान का पेड़ – Teak Tree in Hindi

By | January 7, 2020

टीक (Teak Tree) एक मजबूत लकड़ी वाले पेड़ का नाम है, जिसे हिंदी में सागौन के नाम से जाना जाता है | यह पेड़ अपनी लकड़ियों के लिए प्रसिद्द है, जो मुख्य तौर से फर्नीचर जैसे चीजो को बनाने के लिए उपयोग में लाया जाता है | तो आइये जानते हैं, इस सागौन पेड़ के बारे में की यह किस प्रकार का होता है, कहाँ पाया जाता है तथा इसकी जीवनकाल कितनी होती है, इत्यादि |

English Name: Teak
Hindi Name:
सागौन / सागवान का पेड़ 
Scientific Name:
Tectona grandis
Family: Lamiaceae

Teak tree image

परिचय/Introduction

यह सागौन एक सदाबहार पेड़ है, जो सदैव हरा भरा रहता है | इस पेड़ को संस्कृत भाषा में शाक के नाम से जाना जाता है, जो आम तौर पर लगभग 30 से 40 मीटर यानि की 90 से 120 फीट तक की  ऊँचाई प्राप्त कर सकता है | यह पेड़ बढ़ने के साथ-साथ शाखा तथा शिखर पर चारो तरफ से फैला होता है |

इस पेड़ की पत्तियां आम तौर पर हरे रंग के साथ अंडाकार आकार में बड़ी होती है | ये पत्तियां लगभग 15 से 25 cm लम्बे तथा 10 से 20 cm चौड़े होता हैं | इसकी लकड़ियाँ काफी मजबूत होने के साथ-साथ हल्की भी होती है, जिसके लिए यह बहुत ही ज्यादा प्रसिद्द है |

फूल एवं फल / Flower & Fruit:-

इस पेड़ के फूल आम तौर पर जुलाई महीने से खिलने लगते हैं तथा सितम्बर तक खिलके पूरी तरह से तैयार हो जाते हैं | ये फूल सफ़ेद रंग में छोटे-छोटे खिलते हैं | इसके फल आम तौर पर गोलाकार आकार में होते हैं, जो नवम्बर से जनवरी माह के बीच में पाए जाते हैं | ये फल एक छोटे डाल में बहुत सारे निकलते हैं |

कहाँ पाया जाता है/ Where is found:-

यह सागौन मुख्य रूप से भारत, बरमा तथा थाईलैंड का देशज पेड़ है, जो फिलिपाइन द्वीप, जावा तथा मलाया प्रायद्वीप में भी काफी पायी जाता है | यह पेड़ भारत देश के कुछ राज्यों जैसे- मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश (छोटी सीमा), गुजरात, उड़ीसा, राजस्थान एवं आंध्र प्रदेश इत्यादि में काफी मात्रा में पाया जाता है |

इससे मिलते जुलते और भी पेड़ हैं जैसे Sal tree और जामुन का पेड़ |

सागवान पेड़ का जीवनकाल / Lifespan

यह सागौन का पेड़ आम तौर पर बहुत ही उपयोगी पेड़ होता है, जिसे तैयार होने में लगभग 20 से 25 वर्ष लगते हैं तथा उसके बाद इन्हें काट कर उपयोग किया जाता है | परन्तु अगर इस पेड़ को अगर सिर्फ अलगाकर छोड़ दिया जाए तो यह लगभग 45 से 60 वर्ष या उससे भी अधिक समय तक जीवित रह सकता है |

प्रजातियाँ / Varieties

वैसे तो आम तौर पर इस सागौन पेड़ के बहुत सारे प्रजातियाँ पायी जाती हैं, जिनमे भारत में पाए जाने वाले कुछ प्रजातियों के नाम निम्नलिखित प्रकार से दिए गए हैं |

  • Nilambur teak
  • Adilabad teak
  • Dandeli teak
  • Godavari teak
  • Konni teak
  • Mysore teak
  • Balharshah teak
  • Nagpur teak
  • Konkan teak
  • Paratwada teak

रोचक तथ्य /Interesting Facts

  • थाईलैंड में उत्तरायड प्रांत में स्थित यह सागौन दुनिया की सबसे पुरानी सागौन है, जिसकी अनुमानित उम्र लगभग 1500 वर्ष के आस-पास है |
  • यह मुख्य रूप से अपनी लकड़ियों के लिए ही प्रसिद्द है |
  • इसके फूल सफ़ेद रंग में छोटे तथा खुबसूरत होते हैं |
  • इसके लकड़ियों का उपयोग नाव बनाने के लिए भी उपयोग में लाया जाता है |

देखभाल/ Care of Teak Tree

  • यह सागौन का पेड़ आम तौर पर बीजो से उगता है, जिसे अच्छी तरह से तैयार कर करने के बाद हल्की उपजाऊ मिट्टी में बो दे |
  • इसके बीज को बोने के बाद उनमे भरपूर पानी दे ताकि पौधे अपने समय पर बिना खराब हुए आसानी से निकले |
  • अगर आप बीज नहीं लगाना चाहते हैं तो आप नजदीकी नर्सरी से जा कर सागवान के पौधे को खरीद सकते हैं, जिससे आपका काफी समय बच जायेगा |
  • पौधों के तैयार हो जाने के बाद उन्हें ठीक लगभग 1 मीटर के दूरी में ठीक प्रकार से लगाएं |
  • इन्हें लगाने के दौरान इनके जड़ो में ठीक प्रकार से मिट्टी डाले ताकि पौधे अच्छे से लग जाए |
  • पौधे के धीरे धीरे बढ़ने के दौरान इनमे पानी समय समय पर डालते रहे तथा एक से दो बार सिचाई भी अवश्य कर दे |

आप सागवान पेड़ के देखभाल से जुडी पूरी जानकारी यहाँ से http://www.fao.org/3/AC773E/ac773e08.htm प्राप्त कर सकते हैं |

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