Sage Plant Leaf Information in Hindi

By | August 13, 2019

Sage plant का scientific name Salvia officinalis है । Hindi में इसे तेजपत्ते के नाम से जाना जाता है | यह पौधा सुगंधित जड़ी बूटी Mint परिवार (लामियासी) से सम्बन्ध रखता है और इसकी तीखी पत्तियों के लिए इसकी खेती की जाती है। यह पौधा mint परिवार के पौधों का सबसे बड़ा जीनस है। Sage भूमध्यसागरीय क्षेत्र का मूल निवासी है और इसे कई खाद्य पदार्थों में स्वाद के रूप में ताजा या सुखाया कर इस्तेमाल किया जाता है। यह पौधा भूमध्यसागरीय क्षेत्र का मूल निवासी है, जो पूरे दुनिया भर के कई क्षेत्रो में पाया जाता है |

Safe Herlab Plant Information in Hindi

इसके कुछ प्रजातियों का इस्तेमाल जड़ी बूटी के रूप में किया जाता है और कुछ को केवल फूल के लिए उगाया जाता है । इस पौधे के कुछ किस्मों को उनके आकर्षक पत्तियों और फूलों के लिए आभूषण के रूप में भी उगाया जाता है। इसका औषधीय और पाक उपयोग के पीछे एक लंबा इतिहास है ।

English Name: Sage
Hindi Name:
तेजपत्ता
Scientific Name:
Salvia officinalis
Family:
Mint- Lamiasi

अन्य नाम / Other Name

इस ऋषि पौधे को और भी कई नामों से जाना जाता है, जो निम्नलिखित प्रकार से दिए गये हैं |

  • Common sage
  • Garden sage
  • Golden sage
  • True sage
  • Culinary sage
  • Broadleaf sage
  • Dalmatian sage

तेजपत्ते का इतिहास / History

Sage plant का उपयोग प्राचीन काल से बुराई, सर्पदंश, महिलाओं की प्रजनन क्षमता को बढ़ाने, के अलावा और कई चीजो के लिए किया जाता आ रहा है। थियोफ्रेस्टस ने दो अलग-अलग sage के बारे में लिखा, एक जंगली undershrub जिसे उन्होंने स्पैकोस कहा, और एक समान खेती वाला पौधा जिसे उन्होंने एलिफिस्पाकोस कहा है । पूरे मध्य युग में इस पौधे की उच्च प्रतिष्ठा थी, इसके उपचार गुणों और मूल्य का उल्लेख करते हुए कई बातें कही गईं। इस पौधे को कभी-कभी S. Salvatrix (Sage उद्धारकर्ता) भी कहा जाता था। यह यूनानियों और रोमनों द्वारा बहुत सम्मानित किया गया था जिन्होंने इसे मांस संरक्षक के रूप में और इसके उपचार गुणों के लिए उपयोग किया था।

10 वीं शताब्दी में, अरब और रोम के लोगों ने अमरता प्रदान करने की अपनी क्षमता के लिए sage को जिम्मेदार ठहराया। इंटरनेशनल हर्ब एसोसिएशन ने ऋषि को 2001 में ‘हर्ब ऑफ द ईयर’ के खिताब से सम्मानित किया था ।

तेजपत्ता का पौधा / Sage Plant

Sage के पौधे में भूरे-हरे खाद्य पत्तियां और फूल होते हैं जो नीले और बैंगनी रंग से सफेद या गुलाबी रंगों के हो सकते हैं। वर्तमान में, इसकी खेती यूगोस्लाविया, इटली, अल्बानिया, तुर्की, पुर्तगाल, स्पेन, साइप्रस, इंग्लैंड, कनाडा और संयुक्त राज्य अमेरिका में की जाती है। भारत में, यह जम्मू में बड़े पैमाने पर उगाया जाता है।

पत्तियां: ये पत्तियां आकार में लगभग 2 से 4 इंच लंबे तथा 1 से 1.5 इंच चौड़े होते हैं, जिसके बीचो-बीच एक सीधी रेखा खिची होती है | ये पत्तियां आकार में तिरछे तथा हल्के बैगनी, भूरे तथा हरे रंग के होते हैं तथा इनकी निचली भुजा बड़ी संख्या में महीन बालों के कारण सफेद होती है |

फूल: इस पौधे के फूल गुलाबी, सफ़ेद तथा नीले रंगों में खिले हुए होते हैं, जो दिखने में बहुत ही ज्यादा खूबसूरत होते हैं | ये फूल आम तौर पर गर्मियों के मौसम में ही उगते हैं, जिसे केक में सजाने के लिए भी उपयोग किया जाता है | इसके अलावे यह फूल vitamin तथा खनिज का एक अच्छा स्रोत भी है |

तेजपत्ते की प्रजातियाँ / Different Type of Sage

Sage Leaf

वैसे तो दुनिया भर में sage की 900 से अधिक प्रजातियां हैं। लेकिन हम आपको छह ऐसे अलग-अलग प्रकार के sage के बारे में बताने जा रहे है जो अपने रंग और उपयोग में भिन्न होते हैं, लेकिन ये सभी किसी भी बगीचे के लिए एक अद्भुत जोड़ बनाते हैं।

  1. Garden Sage – यह sage का सबसे आम प्रकार है। इसका उपयोग खाना पकाने के लिए, चाय बनाने के लिए, या केवल सजावट के लिए किया जा सकता है। sage का याक प्रजाति नरम पत्तियों के साथ सिल्वर ग्रीन color का होता है, जिसका उपयोग ताजा या सुखा दोनों हिन् रूप में किया जा सकता है । एक चम्मच garden sage में कई शक्तिशाली पोषक तत्व शामिल हैं: जैसे की 3mg मैग्नीशियम, 1mg फास्फोरस, 7mg पोटेशियम, 24 mcg बीटा कैरोटीन आदि । इसके प्रति 100 ग्राम वजन में लगभग 315 कैलोरी होती है।
  2. Pineapple Sage – यह प्रजाति चिड़ियों और तितलियों को आकर्षित करता है । इसे खाने पकाने के उपयोगों के लिए नहीं बल्कि औषधीय गुण के लिए अधिक जाना जाता है ।
  3. Russian Sage – इस प्रजाति के पत्ते सिल्वर-ग्रे color के होते हैं और यह छोटे, नीले या लैवेंडर ट्यूबलर फूल पैदा करते हैं। यह खाने के उपयोग में लाने वाला sage नहीं होता है । वास्तव में देखा जाए तो, यह sage जीनस में भी नहीं है, न ही यह रूस से आता है, यह वास्तव में अफगानिस्तान और पाकिस्तान का मूल निवासी है।
  4. Purple Sage – यह garden sage की तुलना में कम हार्डी होता है , एक बार जब यह प्रजाति स्थापित हो जाता है – और अगर इसे सर्दियों से संरक्षित कर लिया जाए – तो यह अगले वर्ष वापस से खिलने के लिए तैयार हो जाता है ।
  5. Golden Sage – इस तेजपत्ते की प्रजाति को केवल पाक और जड़ी-बूटी के लिए नहीं बल्कि कई उद्यानों में कड़ाई से सजावटी पौधे के रूप में भी उपयोग किया जाता है ।
  6. Berggarten Sage – इस किस्म बहुत हद तक garden sage के समान होता है सिवाय इसके की इस नस्ल में फूल नहीं होते है । यह प्रजाति क्षारीय मिट्टी को सहन करता है, लेकिन गीली सर्दियों की स्थिति को नहीं।

और भी कई प्रकार के पौधे हैं जैसे Nettle Leaf और Ficus Plant जिससे जुडी जानकारी आप यहाँ से प्राप्त कर सकते हैं |

तेजपत्ते के फायदे / Uses and Benefits of Sage

  • मसूड़े में होने वाले दर्द तथा दांत से सम्बंधित समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए इसके पत्तियों को ठीक पीसकर उपयोग में लाया जा सकता है |
  • कैंसर से सम्बंधित समस्याओं को ठीक करने के लिए इसके पौधे में पाए जाने वाले औषधीय गुणों का उपयोग किया जाता है |
  • रक्तचाप जैस रोगों से सम्बंधित समस्याओं को नियंत्रण में रखने के लिए इसका उपयोग किया जा सकता है |
  • एक हालिया के कुछ अध्ययनों की समीक्षा से पता चला है की sage की प्रजातियां संज्ञानात्मक कौशल को सकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकती हैं और न्यूरोलॉजिकल विकारों से बचा सकती हैं।
  • एक अध्ययन में मधुमेह और उच्च कोलेस्ट्रॉल वाले 40 लोगो को 3 महीने के लिए sage की पत्ती का अर्क लेते हुए देखा गया हैं।
  • Sage कई प्रकार की सूजन को कम करने में helpful होता है ।
  • तेजपत्ते का use पाचन समस्याओं हेतु किया जाता है, जिसमें भूख ना लगना , गैस ,पेट में दर्द और दस्त, जैसी समस्या शामिल है।
  • Sage का use कई प्रकार्र के साबुन और सौंदर्य प्रसाधनों में सुगंध घटक के रूप में किया जाता है।
  • पिछली शताब्दियों में, इसे बालों की देखभाल, कीट के काटने और ततैया के डंक, तंत्रिका की स्थिति, मानसिक स्थितियों, मुंह, जीभ और गले की सूजन के लिए मौखिक तैयारी के लिए भी इस्तेमाल किया गया था इसके अलावा इस पौधे को बुखार को कम करने के लिए भी इस्तेमाल किया गया था।

पोषक तत्व:

इस ऋषि पौधे में पाए जाने वाले पोषक तत्व हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत ही लाभकारी है | इसमें पाए जाने वाले पोषक तत्व निम्नलिखित प्रकार से दिए गए हैं |

  • कैलोरी
  • प्रोटीन
  • कार्ब्स
  • वसा
  • लोहा
  • विटामिन बी 6
  • कैल्शियम
  • मैंगनीज

तथ्य / Facts of Safe Leaf

  • यह अजवायन, लैवेंडर, मेंहदी, थाइम, और तुलसी के साथ sage mint परिवार का हिस्सा है।
  • हाल हीं में, sage के स्वास्थ्य लाभों का प्रदर्शन करने वाले अध्ययनों की संख्या में वृद्धि हुई है।
  • Sage plant में anti-inflammatory और antioxidant compounds की एक श्रृंखला शामिल है ।
  • Sage tea आम sage की पत्तियों से बनाई जाती है।

तेजपत्ते को कैसे रखे / Storage of Sage Leaf

ताजे sage के पत्तों को कागज के तौलिये में लपेटें और उन्हें एक बंद प्लास्टिक बैग में रखें और इसे चार से पांच दिनों तक फ्रिज में रख कर इसका उपयोग करें। सूखे sage के पत्ते को एक एयरटाइट ग्लास कंटेनर में पैक कर के किसी सूखे स्थान पर स्टोर करने से यह लगभग छह महीने तक रहेगा।

Precaution

प्राकृतिक sage ज्यादातर लोगों के लिए सुरक्षित है और इसका कोई ज्ञात साइड इफेक्ट भी कम है। sage का oil का सेवन नहीं करना चाहिए इससे एलर्जी का होना संभव है।

खेती / Farming

आम तौर पर इस ऋषि पौधे की खेती करने में ज्यादा समस्या का सामना नहीं करना पड़ता है | इसकी खेती करने के लिए बहुत ही बारीकी से मेहनत करनी पड़ती है तथा इसे ऐसे क्षेत्रो में लगाना चाहिए जहां की मिट्टी उपजाऊ हो |

भूमी:- आम तौर पर इस ऋषि के पौधे की खेती किसी भी प्रकार की भूमी में की जा सकती है, परन्तु उपजाऊ होनी चाहिए | इसकी खेती करने के लिए सबसे पहले मिट्टी की जांच करले के उस मिट्टी का ph मान 6.5 से 7.0 के अंतराल में है | अगर मिट्टी ठीक प्रकार हो, तो उसमे बड़े ही आसानी से खेती की जाती सकती है |

जलवायु:- वैसे तो इस ऋषि के पौधे को लगाने के लिए किसी खाश जलवायु की जरुरत नहीं पड़ती है | लेकिन इसे लगाने के सबसे बेहतर जलवायु गर्मी तथा ठण्ड दोनों होता है, जिससे बीज को बोने के बाद बीज आसानी से अंकुर जाता है | उसके बाद बरसात के मौसम से पहले पौधे लगाने से पौधे ठीक प्रकार से लग जाते हैं |

खेत की तैयारी:- इस ऋषि की खेती करने के लिए बीज को बोने के लगभग 10 दिन पहले खेत में सड़े हुए गोबर का छिडकाव पूरे खेत में ठीक प्रकार से करे | उसके बाद खेत की जुताई करके भूमी को दोमट मिट्टी जैसी खुरखुरी बना दे तथा बीज बोने से एक दिन पहले खेत की जुताई एक बार फिर करले |

लगाने का समय:- इस ऋषि के पौधे को लगाने के लिए इसके बीज को बोने का सबसे बेहतर मौसम जुलाई अंतिम से लेकर अगस्त तक होता है | इसके बीज के पौधे तैयार हो जाने के बाद उसे लगाने का सबसे बेहतर मौसम अगस्त से लेकर अक्टूबर तक का होता है |

पौधा कैसे लगाएं:- इसके बीज से पौधे निकलने के बाद बड़े हो जाने से इसका रोपण करने के लिए खेत में लगभग 5 से 7 इंच गड्ढा करना चाहिए | पौधे का रोपण करने के बाद उसके जड़ में ठीक प्रकार से मिट्टी डालकर अच्छे से लगाएं | उसके बाद अगले पौधे को लगाने के लिए गड्ढा लगभग ½ मीटर की दूरी छोड़कर ही लगाने के लिए अगला गड्ढा खोदे |

पानी:- इस ऋषि के पौधे की खेती करने के लिए पानी हमेशा पौधे में डालते रहना चाहिये | इसके पौधे को लगाने के तुरंत बाद इसके जड़ के चारो तरफ पानी ठीक प्रकार से डाले, इससे सारे पौधे ठीक प्रकार से मिट्टी में लग जाएंगे | पौधे के लग जाने के बाद उसमे रोजाना सुअभ शाम पानी डालते रहे ताकि पौधा सुखकर मर ना जाए | एक बात हमेशा याद रखे पौधे में पानी जब भी डाले जरुरत के हिसाब से ही डाले अन्यथा उसका जड़ गल सकता है |

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