Rohira Flower & Tree in Hindi – राजस्थान राज्य का फूल

By | August 10, 2019

Rohira जिसका वानस्पतिक नाम टेकोमेला उण्डुलता है एक प्रकार का फूल होता है । आमतौर पर यह फूल  राजस्थान के थार मरुस्थल  में व  पाकिस्तान  मे पाया जाता है। 21 October सन 1983  में Rohira को राजस्थान का राजकीय पुष्प घोषित किया गया था । रोहेड़ा को मरुभूमि का सागवान भी कहा जाता है ।  आइये अब Rohira  flower और tree के बारे में कुछ और जानकारियां प्राप्त करते है जैसे की यह किस मौसम में खिलता है , इसके उपयोग क्या है, यह किस प्रकार के मिट्टी में उगता है इत्यादि।

Rohira tree also known as tecomella in English

इस रोहिरा फूल को English में Tecomella undulata नाम से जाना जाता है | यह एक ऐसा पेड़ है जो की 0 degree ठण्ड से ले कर गर्मी की 48 degree तक को सह सकता है |

रोहिरा का परिचय / About Rohira Flower

रोहिरा का फूल एक मध्यम आकार का पेड़ कर खिलता है जो की ज्यादातर पाकिस्तान और भारत के थार रेगिस्तानी इलाकों में पाया जाता है। इसके पेड़ विशेष रूप से अपनी उत्कृष्ट गुणवत्ता वाली लकड़ी के लिए हीं जाने जाते है। यह मूल रूप से ठोस लकड़ी के एक महान स्रोत के रूप में उपयोग किये जाते है। इस पेड़ की लकड़ी से बनाई गई कोई भी वस्तु बहुत हीं मजबूत होती है । यही कारण है की दूसरे पेड़ों की तुलना में रोहिड़ा के पेड़ का अधिक दामो में बीकता है।  यह एक सदाबहार या पर्णपाती वृक्ष कहलाता है। आमतौर पर रोहिरा के पेड़ फ्लैट के साथ-साथ कोमल पहाड़ी ढलानों और खड्डों वाले स्थानों पर होता है।

मिट्टी

रोहिरा फूल का वृक्ष बलुई मिट्टी के लिए अनुकूल है जो की दोमट को बहाती है। हालांकि, इसके कई प्रजातियां रेत के टीलों वाले क्षेत्रों पर भी उगती हैं जो की बेहद अस्थिर जलवायु परिस्थितियों का सामना करते हैं। 

जलवायु

रोहिरा के फूल अधिकांशतः प्रति वर्ष केवल 150 से 500 मिमी तक अल्प वर्षा वाले क्षेत्रों में बढ़ता है। इसके अलावा यह परिवर्तनशील जलवायु परिस्थितियों के साथ भी खड़ा हो सकता है । यह सर्दियों में अत्यधिक कम तापमान (0°C से 2°C) और ग्रीष्मकाल में उच्च तापमान (48°C से 50°C) का सामना कर सकता है। वास्तव में इस पेड़ के लिए सूरज की गर्मी बहुत जरुरी होती है। सूरज की तेज किरण में इसका जन्म और विकास काफी अच्छे से होता है। यह फूल दिसंबर से फरवरी महीने के बीच में विभिन्न आकर्षक दिखावटी फूलों का उत्पादन करता है। 

हमारे देश में और भी अन्य पेड़ है जैसे की:

Banyan Tree

Jamun Tree

Anjeer Tree

रोहिरा के  वृक्ष / फूल / पत्ते

रोहिरा पेड़ की जड़ें मिट्टी की ऊपरी हिस्से तक फैल जाती हैं। रोहिरा की शाखाएं नीचे जमीन की तरफ झुकी हुई होती हैं जिस पर छोटे छोटे बहुत से पत्ते लगे होते है । इसके पत्ते लम्बे व आगे से नुकीला किस्म के होता है। इन पत्तियों का ऊपर का हिस्सा डार्क green color का होता है और नीचे का हिस्सा हल्का हरा रंग का होता है।

इसके फल हलके मुड़े हुए खिलते है और अन्दर के बीज बालदार होते हैं। कहा जाता है की बीज के इन्ही बालों की वजह से यह हवा के साथ उड़कर राजस्थान में दूर-दूर इलाको में फैल गया है । रोहिड़ा का फूल बेहद खूबसूरत, खुशबूदार और शानदार होता है। इसकी महक कोसो दूर तक फैलती है। आमतौर पर रोहिरा के फूल नारंगी, पीले और लाल रंगों में पाए जाते है । इस फूल की आकृति घंटी के समान प्रतीत होती है।

औसधीय गुण / Medicinal Properties

ऊपर बतलाये गए सभी चीजों के अलावे रोहिरा का कई प्रकार के रोगों में इलाज के लिए काम लिया जाता है | अगर कोई Syphilis बीमारी से पीड़ित है तो यह Rohira के छाल का उपयोग कर के इससे छुटकारा पा सकता है | इसके अलावे इसका उपयोग लीवर की बीमारी में और सफ़ेद दाग (leucoderma) जैसी बीमारी को ठीक करने के लिए उपयोग में लाया जाता है |

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