पीपल का पेड़ से जुडी जानकारी – Peepal Tree Information in Hindi

By | March 19, 2019

पीपल  का पेड़ को अंग्रेजी में Ficus religiosa या sacred fig कहते है । इसे बोधि वृक्ष, पिप्पला वृक्ष, पीपल वृक्ष, पीपल वृक्ष या अश्वत्थ वृक्ष के नाम से भी जाना जाता है । इसे बरगद के पेड़ की जाति का हीं एक विशालकाय वृक्ष माना जाता है किन्तु इसी  छाया बरगद से कम होती है । पीपल के पेड़ को कई धर्मो में एक धार्मिक महत्व माना जाता है । पीपल के पेड़ का आत्मज्ञान और शांति का अपना प्रतीकात्मक अर्थ है।  यह पेड़ एक बहुत लंबा जीवनकाल वाला पेड़ होता है, जिसका औसत जीवन लगभग 900 से 1500 सालो के बीच होता है । इसलिए इस पेड़ को दीर्घायु वृक्ष भी कहा जाता है । आइये अब इस पेड़ के बारे में और भी विस्तार से जानते है ।

पीपल के पेड़ का परिचय (Introduction of Peepal Tree)

पीपल का पेड़ एक बड़ा हीं शुष्क मौसम-पर्णपाती या अर्ध-सदाबहार पेड़ कहलाता है । इस पेड़ का का विस्तार, फैलाव और ऊंचाई व्यापक और बहुत हीं विशाल होता है। यह पेड़ लगभग 30 मीटर यानि की 98 fit तक लंबा होता है और लगभग 3 meter तक के ट्रंक व्यास के साथ होता है। इसके पेड़ के फल बरगद-गूलर के जैसा बीजों से भरा हुआ और मूँगफली के छोटे दानो की तरह होता है । इसके बीज राई के दाने से भी आधा होता है फिर भी इसका वृक्ष विशालतम रूप ले कर कई सालो तक जीवित रहता है । इस पेड़ की जड़े बहुत हीं मजबूत और फैली हुई होती है ।

पत्ते (Leaves)

Peepal Leaves

इस पेड़ की पत्तियों का आकार heart shape का और पान के समान होता है । इसके पत्ते लगभग 10 से लेकर 17 cm लंबे और 8 से 12 cm चौड़े होते हैं । पीपल के  पत्ते बहुत हीं सुन्दर, कोमल, चिकने व चौड़े  होते है । सामने की ओर से इसके पत्ते नुखिले होते है ।

बसंत ऋतु के समय इसके पत्तो  पर घने रंग के नए कोंपलें आने लगते है और फिर यही पत्ते  गहरे हरे रंग के हो जाते है । भारत में कई स्थानों पर लोग पीपल के पत्तों को इकट्ठा करते उसे साफ करते हैं, और फिर उसे  सुखा कर उन्हें सालों तक संरक्षित करने के लिए सोने के एक्रिलिक से रंगते हैं। पीपल के नए पत्ते हलके और भूरे रंग के होते है । इसकी पत्तियों का उपयोग ऊंटों और हाथियों को खिलाने के लिए भी किया जाता है ।

औसत आयु (Average Life Span of Peepal Tree)

Very old Peepal Tree

अन्य पेड़ों के वनिस्पत, पीपल के पेड़ की आयु काफी ज्यादा होती है | औसतन एक पीपल के पेड़ की आयु (average life span) 900 से 1,500 years होती है | कुछ पेड़ तो 3,000 years तक जीवत रहते हैं |

जलवायु  (Climate)

पीपल के पेड़ भारतीय उपमहाद्वीप के मूल निवासी हैं और यह गर्म, आर्द्र मौसम में सबसे ज्यादा पनपे हैं। यह पेड़ सूर्य के प्रकाश को ज्यादा पसंद करते हैं । वैसे तो यह पेड़ खुद ब खुद कहीं भी पनप जाता है लेकिन ज्यादातर दोमट प्रकार के मिट्टी पर सबसे अच्छा पनपते है ।  मार्च और अप्रैल के महीने में इसके पत्ते झड के गीर जाते है ।

सांस्कृतिक महत्व

Peepal Tree at temple compound in India

पीपल के पेड़ का भारत में विशेष रूप से बौद्धों के बीच बहुत महत्व है जो पीपल के पेड़ को बुद्ध के रूप में मानते हैं। भगवान बुद्ध ने पीपल के पेड़ के नीचे आत्मज्ञान प्राप्त किया । इसे पवित्र वृक्ष माना जाता है और लोग धार्मिक उद्देश्यों के लिए इसकी पत्तियों का उपयोग करते हैं। भारत में हिन्दुओं द्वारा पीपल के पेड़ के लिए एक अलग हीं सम्मान हैं, वे इसे उस पेड़ के रूप में मानते हैं जिसके नीचे भगवान् विष्णु जी का जन्म हुआ था।

कुछ महत्वपूर्ण बातें (Interesting Facts about Peepal Tree)

  • फिकस रेलिजियोसा जिसे हिंदी में पीपल का पेड़, पिप्पला वृक्ष, बोधि वृक्ष और पिप्पला वृक्ष भी कहा जाता है |
  • बौद्ध धर्म, हिंदू धर्म और जैन धर्म में पीपल के वृक्ष को पवित्र धार्मिक रूप में पूजा जाता है |
  • हिन्दू अथर्ववेद में पीपल के पेड़ को देवताओं का निवास स्थान बताया गया है |
  • पीपल का पेड़ सामान्यता लम्बाई 10 से मीटर (33 से  फीट) तक और मोटाई  लगभग 200 से 300 सेंटीमीटर से ज्यादा होती है |
  • यह उथली मिट्टी, रॉक दरारें, जलोढ़ रेतीले दोमट, काली, लाल मिट्टी पर पाया जाता है ।
  • पीपल पेड़ काफी घना और विशाल रूप में विकसित होता है और प्रदुषण नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है क्योंकि यह ज्यादा मात्रा में कार्बन को सोखता है और ऑक्सीजन देता है |
  • पीपल पेड़ की आयु संभवतः 900 से 1,500 वर्ष के आसपास आंकी गई है।
  • आयुर्वेद और वनस्पति विज्ञान में पीपल का पेड़ कई तरह से फायदेमंद माना गया है। जैसे सांस की तकलीफ, गैस या कब्ज, दांतों के लिए ,विष का प्रभाव, त्वचा रोग, घाव होने पर, जुकाम, त्वचा के लिए, तनाव कम करने में औषधि के रूप में उपयोग किया जाता है |
  • फिकस रेलिजियोसा (पीपल) का वृक्ष भारतीय उपमहाद्वीप और इंडोचीन की मूल की एक प्रजाति है |
  • इसकी शाखाएं पतली टहनियों के रूप में व्यापक रूप से फैलती हैं | पत्ते लगभग 16 से 18 सेमी लंबी विस्तारित दिल के आकार की होती है । एक ही पौधे पर फूल या तो नर या मादा (मोनोसेक्शुअल) होते हैं।

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