Parsley in Hindi – अजवाइन का पौधा, पत्ते, बीज और फायदे

By | February 1, 2020

Parsley को हम सभी हिंदी में अजवाइन या अमजोद के नाम से जानते हैं | इसके leaf से ले कर seeds तक की जानकारी यहाँ प्राप्त करे | अजवाइन भारत के व्यंजनों में उपयोग होने वाले कुछ प्रमुख मसालों में से एक है | इसमें कई प्रकार के आयुर्वेदिक गुण भी पाए जाते हैं, जो हमारे स्वास्थय के लिए बहुत ही लाभकारी हो सकती है | यह एक प्रकार का सुगंधित तथा स्वादिष्ट मसाला है, जिसे कई प्रकार के व्यंजनों में डाला जाता है | लेकिन क्या आप जानते हैं, की हम जिस अजवाइन को बड़े मजे से अपने उपयोग में लाते है, इसकी खेती किस प्रकार से की जाती है तथा इसे किस तरह से हम तक पहुँचाया जाता है, आदि | तो आइये हम जानते हैं, की इस अजवाइन की खेती कैसे की जाती है तथा इसे हम तक कैसे पहुँचाया जाता है |

Parsley plant or amjod

English Name: Parsley
Hindi Name: Ajwain (अजवाइन ) /  Amjod
Scientific Name: Trachyspermum ammi
Family: Umbellifers

परिचय / Introduction

यह अजवाइन एक प्रकार का सदाबहार पौधा है, जिसकी औशत ऊँचाई लगभग 60 cm से 90 cm तक हो सकती है | यह एक प्रकार का झाड़ीदार पौधा है, जिसमे कुछ खुशबूदार पत्तियों के साथ-साथ उसके फूल निकले होते हैं | इसके सभी भागों जैसे पत्तियां, फूल, बीज आदि को उपयोग में लाया जा सकता है, क्यूंकि इसके सभी भागों में औषधीय गुण पाए जाते हैं | इसके बीज दिखने में छोटे-छोटे होते हैं, जो हल्के पतले आकर के होते हैं, जो दिखने हल्के सौफ के जैसे दीखते हैं |

प्रजाति / Species of Parsley

पूरे दुनिया भर में इस अजवाइन की लगभग 350 से भी अधिक प्रजातियाँ पायी जाती हैं, जिनमे कुछ निम्नलिखित प्रकार से दिए गए हैं |

  1. एंड मोविक अजवाइन
  2. अल्ताइकस
  3. एम्यूरेंसिस
  4. बोइसिएरी
  5. ब्रेक्टोसस
  6. कैस्पिटिशस
  7. कपूरेटस
  8. कैपिटैटस
  9. कार्नोसस
  10. सेफलोटस

अजमोद के पत्ते / Parsley Leaf

इसके पत्ते देखने में हरे रंग के होते हैं और काफी पतले और लचीले होते हैं | कुछ हद तक यह अजमोद देखने में धनिया के पत्ते के तरह दीखता है |

अजमोद के फायदे  / Benefits of Parsley in Hindi

  • इसका सेवन करने से शरीर में दर्द होने वाली समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है |
  • गठिया रोग में होने वाली दर्द को कम करने के लिए इसका उपयोग किया जा सकता है |
  • भूख न लगने की समस्या से राहत पाया जा सकता है |
  • इस अजवाइन का सेवन करने से पेट साफ़ होता है |
  • पेट में दर्द हो तो इस अजवाइन का सेवन करने से उससे भी राहत पा सकते हैं |
  • घरों में भोजन बनाने के लिए इसका उपयोग किया जाता है |

यह भी जाने की अंजीर का पेड़ और फल के फायदे कौन-कौन से हैं |

रोचक तथ्य / Interesting Facts

  • यह अजवाइन सुगंध देने वाला एक मसाला के रूप में है, जो दिखने में बहुत ही छोटा होता है |
  • इसे किसी भी प्रकार के व्यंजन को स्वादिष्ट बनाने के लिए उपयोग किया जाता है |
  • इसमें कई ऐसे गुण पाए जाते हैं, जो हमें अनेक प्रकार के रोगों से बचाते हैं |

खेती कहाँ की जाती है

इस अजवाइन की खेती उत्तरी अमेरिका, मिस्त्र ईरान, अफगानिस्तान में की जाती है | इसके आलावे भारत के कुछ राज्यों में जैसे:- महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, मध्य्प्रदेश, उत्तरप्रदेश, पंजाब, तमिलनाडु, बिहार, आंध्रप्रदेश तथा राजस्थान के कुछ हिसों में अजवाइन खेती काफी मात्रा में की जाती है |

Parsley plant for farming

खेती / Farming

वैसे तो इस अजवाइन की खेती करने में ज्यादा परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ता है | इसकी खेती करने के लिए सबसे पहले सही तरीके से इसके बारे जानकारियाँ प्राप्त करले अन्यथा कही ऐसा न हो की, पौधे खराब होने लगे |

जलवायु: इस अजवाइन की खेती करने के लिए इसकी बुवाई करने का मौसम हल्का शुष्क रहने से यह काफी एहतर होता है | यह अजवाइन का पौधा एक ऐसा पौधा है, जो न तो ज्यादा गर्मी सहन कर सकता है और न ही ज्यादा ठंडी सहन कर सकता है | हालाँकि यह कुछ स्तर तक पाले को सहन कर सकता है |

मिट्टी: इसकी खेती करने के लिए जल निकास वाली दोमट मिट्टी वाली बहुत अच्छी होती है | अजवाइन एक प्रकार का रबी मसाले वाला फसल है, जिसकी खेती करने के लिए खेत अच्छे से तैयार करने के लिए सबसे पहले खेत की जुताई ठीक प्रकार से करें | एक बार जुताई करने के कुछ दिनों बाद इसकी जुताई एक बार फिर से करें ताकि मिट्टी एक दम भुभुरी हो जाए | इसे ऐसी मिट्टी में बड़े ही आराम से उगाई जा सकती है, जिसका ph मान लगभग 6.5 से लेकर 8.2 तक हो |

बीज बोने का समय: इस अजवाइन के बीज को बोने का सबसे बेहतर समय सितम्बर के शुरुआत से लेकर अक्टूबर के अंतिम तक होता है | बीज की बुवाई करने से पहले उसे भिगोदे ताकि अगर बीज के बुवाई के दौरान उचित तापमान न मिले तब भी वह अंकुरित हो सके | बीज को बोने के दौरान बीज की दुरी कम से कम 30-40 से.मी. रखे | जब बीज अंकुरित होकर ठीक तरह से निकालने लगे तब उन्हें ज्यादा पाला न लगने दे | बीज लगभग 10 से 12 दिनों में अंकुरित होकर तैयार हो जाता है

पौधा रोपण: पौधे के तैयार होने के बाद उन्हें लगाने के सबसे उचित समय अक्टूबर के अंतिम लेकर नवम्बर के मध्य तक होता है | इन पौधों को लगाने के दौरान हमेशा याद रखे की पौधे से पौधे की दुरी लगभग 15-25 से.मी. हो ताकि बाद में वह बड़े होकर एक दुसरे को बढ़ने से रोके न |

पानी:- पौधे के लगने के कुछ समय तक उनमे पानी प्रदान करने से पौधे सही तरीके से लगते हैं तथा समय पर तैयार हो जाते हैं | अगर पौधों में पानी नहीं भी डालते हैं तब भी वो मरेंगे नहीं लेकिन वे सही तरीके से तैयार नहीं हो पाएँगे |

खाद: अजवाइन के खेती में इसकी भरपूर पैदावार के लिए 10 से 15 दिन पहले सड़ी हुई गोबर को खेत में अच्छी तरह से छिडकाव करदे और उसकी जुताई करके उसे अच्छी तरह से मिलादे | पौधे की बुवाई से पहले उसमे उर्वरक के रूप में नत्रजन, फास्फोरस तथा पोटाश उनमे डाले | पौधे को लगाने के लगभग 20 से 25 दिन बाद उसमे फिर उन्ही खादों फास्फोरस, नत्रजन तथा पोटाश को डालकर छोड़ दे |

तो दोस्तों आशा करती हूँ की आपको ajmod in Hindi का मलतब अब समझ में आ गया होता और साथ ही parsley के पौधे और seeds (बीज) की जानकारी भी अच्छी लगी होगी |

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *