नीम का पेड़, विशेषताएं, उपयोग, खेती और फायदे | Neem Tree in Hindi

By | January 23, 2020

यह नीम Meliaceae परिवार से सम्बंधित एक पर्ण- पाती पेड़ है, जिसे “भारतीय बकाइन” के नाम से भी जाना जाता है | आम तौर पर यह बड़े ही आसानी से नजर आने वाले पेड़ हैं, जो वातावरण को स्वच्छ रखने में काफी मदद करते हैं | इस पेड़ के पतली तनो से दातुन करने से मसूड़े स्वस्थ रहते हैं | इस नीम के पेड़ में बहुत सारे औषधीय गुण शामिल हैं, जो कई रोगों के उपचार के रूप में उपयोग भी किया जाता है | तो आइये जानते हैं, की यह किस प्रकार का पेड़ है तथा इसके उपयोग एवं फायदे कौन-कौन से हैं | इसके अतिरिक्त हम यह भी जानेंगे की नीम के पेड़ की देखभाल कैसे की जाती है |

Neem Tree Pedh

English Name: Azadirachta Indica
Hindi Name: Neem (नीम)
Scientific Name: A Indica
Family Name: Mahogany

नीम का परिचय / Introduction

यह नीम का पेड़ तेजी से बढ़ने वाला पेड़ होता है | इसकी ऊँचाई लगभग 18 से 20 मीटर तक जा सकती है, परन्तु इसके कुछ पेड़ लगभग 20 से 25 मीटर की ऊँचाई तक भी जा सकते हैं | यह पेड़ साधारण तौर पर बड़े ही आसानी से मिलने वाले होते हैं, जो हमारे आस-पास के बगानों या सड़कों के किनारे में लगे होते हैं | यह भारत में हजारों वर्ष पूर्व से एक आयुर्वेदिक पेड़ के नाम से जाना जाता है |

जीवनकाल / Lifespan

इस नीम पेड़ के जीवन काल के बारे में ऐसा माना जाता है, की यह लगभग 100 से 150 साल तक जीवित रह सकता है | परन्तु अभी इस बात की पूर्ण पुष्टि नहीं हो पायी है, इसलिए इसे पूरी तरह से सही नहीं माना जा सकता है |

कहाँ पाया जाता है: यह भारत देश में काफी मात्रा में पाया जाता है, इसके अलावे यह थाईलैंड, इंडोनेशिया, श्रीलंका पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल तथा म्यानमार, आदि देशों में भी पाया जाता है |

नीम की पत्तियां

इस नीम के पेड़ की पत्तियां गहरे हरे रंग में होती है, जिसकी ऊपर की सतह चमकीली होती है | ये पत्तियां हल्के नुकीले लोबे वाले होते हैं, जो स्वाद में बहुत कडवे होते हैं |

नीम का फूल

Neem Flower

ये इस नीम के पेड़ के फूल सफ़ेद रंगों में एक गुच्छे में खिले हुए होते हैं, जो दिखने में सुन्दर लगते हैं | हर फूलो में लगभग 5 पंखुडियां होती हैं, जो इस फूल के खिलने के बाद अच्छी तरह से नजर आते हैं | इसके फूलों का उपयोग भारतीय भोजन के रूप में भी किया जाता है, जो स्वाद में कड़वा होता है |

फल

Neem fruit phal

नीम के पेड़ में होने वाले फल बहुत ही तेजी से बढ़ने वाले होते हैं, जो जल्द ही बढकर अपने आकार में आ जाते हैं | ये फल दिखने में हल्के हरे रंग का होता है तथा इसमें आम की तरह एक लम्बी बीज होती है | लेकिन संख्या में ज्यादा होते हैं | इन फलों को जब कुचला जाता है, तब इसमें से एक प्रकार का कड़वापन जैसा गंध होता है |

बीज

वैसे तो आम तौर पर ये द्विबीजपत्री होते हैं तथा एक फल में एक ही बीज होते हैं | इस बीज के सफेद आवरण को उतारने पर बीज से काफी मात्रा में तेल निकलती है, जिसका उपयोग आयुर्वेदिक दवा के तौर पर किया जाता है |

प्रजातियाँ / Varieties

इस नीम के पेड़ के दो प्रजातियाँ पायी जाती हैं, जो निम्नलिखित प्रकार से हैं:

  • Azadirachta Excelsa
  • Azadirachta indica

विशेषताएं / Features

वैसे तो यह नीम खाश तौर पर एक आयुर्वेदिक पेड़ के रूप में है तथा इसके अन्य कई विशेषताएं हैं, जो निम्नलिखित प्रकार से हैं |

  • इस नीम का पेड़ भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे देशों का मूल वृक्ष है |
  • नीम के पेड़ की तने को तोड़कर उसे मुंह धोने के लिए दतुए के रूप में उपयोग किया जाता है |
  • इस पेड़ का औषधीय बहुत ही ज्यदा महत्वपूर्ण है |
  • इस नीम की गंध में इतनी ताकत होती है की, इस पे दमे कोई भी कीडा नहीं बैठता है |
  • इसकी पत्तियां रक्त को शुद्ध कर देती हैं |
  • यह लगभग 200 वर्ष तक जीवित रह सकता है |

उपयोग / Uses of Neem

Neem plant benefitsआपको जान कर हैरानी हो सकती है की नीम का पेड़ का हर भाग फायदेमंद हैं | तो चोलिये जानते हैं नीम का उपयोग और फायदे से जुडी जानकारी के बारे में:

  • यह नीम Antifungal तथा Antidiabetic गुणों से भरपूर होता है, जो हमारे शरीर होने वाली समस्याओं को रोकता है |
  • त्वचा को साफ करना या संक्रामक रोगों से त्वचा को सुरक्षित रखने के लिए नीम से (नीम लोशन, नीम साबुन, आदि) बनाए जाते हैं |
  • बुखार, पेट खराब या साँस लेने में होने वाली परेशानी से छुटकारा पाने के लिए भी इसका उपयोग किया जा सकता है |
  • इस नीम के तेल का उपयोग करने से सर की खोपड़ी तथा बाल की जड़ की समस्या के लिए बहुत ही बेहतर माना जाता है |
  • हांथों के या पैरों के मरे हुए त्वचा को हटाने के लिए उबले हुए पानी के साथ दवा को यह पे लगाना सकता है |
  • त्वचा में होने वाले किसी भी समस्या को दूर करने के लिए उपयोग किया जा सकता है |
  • नीम पेड़ के छोटे शाखाओं का उपयोग दान्तो की सफाई के लिए किया जा सकता है |
  • इस नीम का उपयोग मनुष्य के रक्त को शुद्ध करने के लिए भी कर सकते है |
  • यह चिकनपॉक्स, मलेरिया, चेचक और शरीर के दाने में भी उपयोगी है।
  • नीम की छाल को पीसकर उपयोग में लाने से पेट तथा अल्सर की समस्या को दूर किया जा सकता है |

इस तरह के कुछ और औषधीय पौधे और पेड़ हैं जैसे की lemongrass या फिर अर्जुन वृक्ष जिसके अनेक प्रकार के फायदे हैं |

नीम की खेती / Neem Farming

वैसे तो आम तौर पर इस नीम के पेड़ पौधे की खेती करने में ज्यादा समस्या नहीं होती है, परन्तु इसे तैयार होने में कुछ सालों का समय लग जाता है |

जलवायु: आम तौर पर नीम के पौधे गरम जलवायु में बेहतर तरीके से लग सग सकते हैं | इसके अलावे यह बारिश वाली जलवायु में भी अच्छी तरह से उग सकते हैं, इसलिए इसे गर्म या बरसात किसी भी जलवायु वाले समय में लगा सकते हैं |

भूमी: भूमी को तैयार करने के लिए सबसे पहले मिट्टी में सड़े हुए गोबर का छिडकाव करे तथा पौधे को लगाने से पहले भूमी की ठीक तरीके से जुताई करके मिट्टी को भुर-भुरी बना दे तकी पौधा ठीक तरीके से लग सके | पौधे को लगाने से पहले मिट्टी की अच्छी तरह से जांच करले और पौधा वही लगाएं जिसका ph मान 7 हो |

लगाने का समय: इस पौधे को लगाने के लिए सबसे अच्छा मई से लेकर अगस्त तक का समय हो सकता है | मई माह के शुरुआत यानि दुसरे सप्ताह से ही पौधा रोपण शुरू कर देना चाहिए तथा जुलाई माह के अंतिम तक पौधा रोपण ख़त्म कर सकते हैं |

पौधा कैसे लगाएं: इस नीम के पौधे को लगाने के दौरान लगभग 6 से 8 इंच का गड्ढा खोदे और अगले गड्ढे को लगभग ½ से 1 मीटर की दूरी पर खोदे | फिर उन गड्ढों में पौधों को लगाकर उनके जड़ में ठीक तरह से मिट्टी को एकदम दबाकर डाले ताकि पौधा मिट्टी के सहारे खड़ा रह सके |

पानी: इसे लगाने के बाद इसमें पानी रोजाना डालते रहे ताकि पौधा सही तरीके से अपनी जड़ को फैला सके और भूमी में ठीक प्रकार से लग सके | जब पौधा हल्का बड़ा हो जाए तो थोड़े दिनों के बाद उसमे पानी की मात्रा कम करदे अन्यथा पौधे का जड़ सड़ सकता है |

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