महुआ का पेड़ – Mahua Tree Information in Hindi

By | December 30, 2019

महुआ का पेड़ हमारे भारत देश का एक उष्णकटिबंधीय पेड़ है, जो आमतौर पर मैदानी क्षेत्रो में और  जंगलों में पनपते है। इस वृक्ष का scientific name “मधुका लोंगफोलिआ” है। यह पेड़ अपने फल तथा फूल के लिए बहुत ही ज्यादा प्रसिद्द है, जिसका उपयोग कई प्रकार से किया जा सकता है | तो चलिए जानते हैं, इस महुआ पेड़ के बारे में की यह किस प्रकार का पेड़ है, इसकी जीवनकाल कितनी होती है तथा इसके उपयोग क्या हैं, इत्यादि |

Mahua Tree

English Name: Mahuwa, Mahua, Mahwa, Mohulo, or Iluppai
Hindi Name: महुआ
Scientific Name: Madhuca longifolia
Family: Sapotaceae

महुआ का परिचय / Introduction of Mahua

यह एक सदाबहार पेड़ है, जो पादपों के सपोटेसी परिवार के अंतर्गत आता है। गर्म क्षेत्रों वाले जगहों पर इस पेड़ को इसके बीजों, फूलों और लकड़ीयों के लिये उगाये जाते है। स्वदेशी समुदाय वृक्ष की छाल को औषधि के रूप में, फल को भोजन के रूप में और निश्चित रूप से फूलों को नशे के रूप में उपयोग करते हैं। कई स्थानों पर इसके कच्चे फलों का सब्जियों के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। महुआ पेड़ का एक वृक्ष अपनी आयु के मुताबिक साल में लगभग 20 से लेकर 200 kg तक बीजों का उत्पादन कर सकते हैं।

महुआ का पेड़ / Mahua Tree

इस पेड़ को इंडिया के लगभग सभी इलाको में पाया जा सकता है और यही नहीं ये एक ऐसा पेड़ है जो की पहाड़ों पर लगभग 3 हजार फुट की ऊँचाई तक भी पाया जाता है। बंजर चट्टान की दरार के बीच मिट्टी की जेब में भी, महुआ के पौधे चट्टानी, गंभीर, खारा और सोडिक मिट्टी पर अच्छी तरह से पनपता है। यह पेड़ ऊँचा तथा छतनार होता है और इसकी डालियाँ चारों तरफ फैली होती है।

महुआ एक मध्यम आकार का पर्णपाती वृक्ष है, जो 16-20 मीटर की ऊंचाई तक बढ़ता है। ये एक  बहुत हीं तेजी से बढ़ने वाला पेड़ो में से एक पेड़ होता है ।  इसका एक छोटा, मोटा ट्रंक होता है, जिसका व्यास लगभग 80 सेमी होता है। छाल ग्रे, खड़ी दरार और झुर्रीदार होती है, जो पतली तराजू में छूटती है। इसके लगभग सभी भाग जैसे की इसके फूल, फल, बीज लकड़ियाँ आदि सभी चीजें बहुत हीं उपयोगी होती है।

पत्ते / Leaf

पत्तियों को वैकल्पिक और शाखाओं के अंत में क्लस्टर किया जाता है। इसकी पत्ती लगभग 10-25 सेमी लंबा और 6-12 सेमी चौड़ा, आयताकार आकार, कठोर, मोटा और दृढ़ होता है । इसके निचले हिस्से ऊनी की तरह होती है और टूटने के बाद दूधिया रस निकलता है । युवा पत्ते गुलाबी या लाल-भूरे रंग के होते हैं।

महुआ की पत्तियाँ फागुन चैत के मौसम में झड़ कर गिर जाती हैं। पत्तियों के झड़ जाने के बाद  डालियों पर कलियों के गुच्छे दिखाई देने शुरू हो जाते है । आमतौर देखा जाये तो सालो भर महुआ के पत्ते हरे रंग के हीं रहते हैं।

महुआ के फूल / Flower

Mahua flower

Mahua flower

महुआ के फूल छोटे और मांसल, सुस्त या हल्के सफेद रंग के होते हैं और यह फूल शाखाओं के अंत के पास के फासिकल्स को परिभाषित करते हैं । कोरोला ट्यूबलर, हल्का पीला सुगंधित और कैडियस होते है। मार्च-अप्रैल में सामान्य रूप से फूल आने लगते हैं। सबसे पहले कलियाँ निकलती है और फिर जब वो धीरे धीरे बढ़ती है तो वो कोश के आकार का सफेद फूल बन जाती है जो गुदारा और दोनों ओर खुला हुआ होता है तथा इसके अन्दर जीरे होते हैं। इसी सफ़ेद फूल को “महुआ” कहा जाता है और इसे हीं खाने के उपयोग में भी लाया जाता है। आदिवासियों के लिए यह फूल बहुत हीं उपयोगी रूप से एक खाद्य पदार्थ होता है। इस फूल का उपयोग वे लोग नशीले पदार्थ बनाने में किया करते है ।

इसके अलावा फूलों को पारंपरिक रूप से शीतलन एजेंट, टॉनिक, कामोद्दीपक और कसैले, लोकतांत्रिक और हेलमिन्थेस, तीव्र और पुरानी टॉन्सिलिटिस, ग्रसनीशोथ के साथ-साथ ब्रोंकाइटिस के उपचार के लिए उपयोग किया जाता है। इसके फूल का उपयोग जैम (jam) बनाने के लिए भी किया जाता है, जो की महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले में रहने वाले आदिवासियों द्वारा तैयार किया जाता है।

महुआ के फूलों में अच्छी मात्रा में विटामिन-सी होता है जो इसकी एंटीऑक्सीडेंट गतिविधि के लिए जिम्मेदार है। इसके अलावा महुआ फूल में कैरोटीन होता है जो विटामिन-ए का अग्रदूत है। इसके फूलों में कैल्शियम और फॉस्फोरस जैसे खनिजों की भी अच्छी मात्रा होती है। यही नहीं महुआ के फूलों में कुछ मात्रा में प्रोटीन और वसा भी मौजूद होते हैं ।

फल /Fruit

Mahua fruit

महुआ का फल परवल के shape का होता है, जिसे ‘कलेंदी’ कहते है। इसके फल को छील कर और फिर उसे boil करके इसकी सब्ज़ी बनाई जाती है । जब इसके फल पक जाते है, तो इसका गूदा खाने में मीठा लगता है ।

जीवनकाल  / Lifespan

आम तौर पर इस महुआ के पेड़ को लगाने के बाद ही इसमें फल आते हैं तथा यह जब तक जीवित रहता है तब तक फल देता है | इस पेड़ की औसत जीवनकाल लगभग 45  से 50 वर्ष के आस-पास होती है | परन्तु अगर इसकी देख भाल ठीक प्रकार से की जाए तो यह लगभग 55 से 60 वर्षों तक जीवित रह सकता है |

बीज एवं तेल / Seeds and Oil

Mahua seed

इस महुए से एक प्रकार का तेल प्राप्त किया जाता  है, जो आम तौर पर इसके बीज से निकाला जाता है | इस तेल को प्राप्त करने के लिए इसके बीज को पेड़ से तोडा जाता है तथा इसके मांस वाले छिलके को निकाला जाता है | उसके बाद इसे भिगो देने के बाद इसके कठोर छिलके को हटाया जाता है तथा इसे अच्छी तरह से सुखाया जाता है एवं उसके बाद इसे मशीन में डालकर इससे तेल प्राप्त किया जाता है |

कहाँ उगता है

पेड़ मिट्टी की एक विस्तृत विविधता पर बढ़ता है, लेकिन रेतीली मिट्टी पर सबसे अच्छा पनपता है। यह उथले, बोल्डर, क्लेटी और कैलासीर मिट्टी पर भी बढ़ता है। यह पेड़ अच्छी तरह से ऐसी जगह पर बढ़ता है, जहां वार्षिक वर्षा 500 mm से 1500 mm के बीच होती है और जहां का तापमान 2-46 डिग्री सेल्सियस के बीच होता है।

उपयोग एवं फायदे / Uses & Benefits

आम तौर पर इस महुआ के पेड़ से अनेक प्रकार के लाभ एवं फायदे हैं, जो निम्नलिखित प्रकार से दिए गए हैं |

  • इस महुआ पेड़ के लकड़ियों का उपयोग फर्नीचर तथा दरवाजे एवं खिड़कियाँ बनाने के लिए उपयोग में लाया जाता है |
  • इसकी पत्तियों को बकरी तथा भेड़, इत्यादि जैसे पशुवों के भोजन के रूप में उपयोग किया जाता है |
  • इसके बीज का उपयोग साबुन या तेल का निर्माण करने के लिए किया जाता है ।
  • इस महुआ के तेल का उपयोग प्राकृतिक तेल के रूप में भोजन बनाने हेतु या शारीरिक समस्या से छूटकारा पाने के लिए शरीर में लगाने के लिए भी किया जाता है |
  • इसके बीज से तेल निकाल लेने के बाद इसके बचे हुए खाल का उपयोग  खाद के रूप में या फिर जानवरों को खिलाने के लिए किया जा सकता है ।

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