Lemongrass Information in Hindi – लेमन ग्रास के फायदे, खेती

By | November 12, 2019

यह मुख्य तौर पर एशिया, अफ्रीका तथा ऑस्ट्रेलिया के उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों मे काफी मात्रा मे पाए जाते है | इस लेमन ग्रास का वैज्ञानिक नाम सिम्बेपोगोन फ्लक्सुओसस है, जो मुख्य तौर से भारत तथा अन्य दूसरे देशों मे पाया जाता है | इसमे कई औषधीय गुण भी पाए जाते हैं, जो हमारे स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है |

Lemongrass in Hindi

तो आइये जानते हैं, इस लेमोन ग्रास के बारे मे की यह किस प्रकार का ग्रास है तथा इसके गुण कौन से हैं |

English Name: Lemon grass
Scientific Name:
Cymbopogon
Family:
Grasses
Hindi Name: निम्बू घास / लेमन ग्रास

परिचय / Introduction

यह लेमन ग्रास एक सदाबहार घास है, जो सदैव हरा भरा रहता है | ये झुंड मे उगने वाले घास होते हैं, जो एक साथ बहुत सारे निकलते हैं | इसकी न्यूनतम लंबाई लगभग 5 से 6 फीट होती है | इसकी खेती भारत मे मुख्य रूप से केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश एवं राजस्थान आदि जैसे राज्यों मे उगाया जाता है | इस लेमन ग्रास से एक प्रकार का तेल भी प्राप्त की जाती है |

अन्य नाम / Other Name

इस लेमन ग्रास को अन्य कई नामों से जाना जाता है, जो कुछ इस प्रकार से हैं |

  • कोचीन घास
  • मालाबार घास
  • लेमन ग्रास

प्रजाति:

Varieties of Lemongrass

आम तौर पर इस लेमन ग्रास की लगभग 50 से भी अधिक प्रजातियाँ पायी जाती हैं |

  • Ornamental lemon grass
  • Citronella
  • Java citronella
  • East India lemon grass

इससे मिलता जुलता एक अन्य पौधा है जिसे snake plant के नाम से जाना जाता है, परन्तु उसका उपयोग दूसरा है |

जीवनकाल / Lifespan of Lemongrass

आम तौर पर यह कई वर्षों तक बढ़ते रहने वाला घास है, जिसकी औषत जीवनकाल लगभग 3 से 3.5 वर्षों तक होती है, परंतु अगर इसकी देख भाल ठीक प्रकार से की जाए तो यह लगभग 4 से 4.5 वर्षों तक या उससे अधिक दिन तक जीवित रह सकते है |

गुण एवं विशेषताएँ / Features

  • यह सदैव हरा भरा रहने वाला घास है |
  • इस घास से एक प्रकार का तेल निकाला जाता है, जिसमे कई सारे औषधीय गुण पाए जाते हैं |
  • इसकी पत्तियों को चाय मे खुश्बू लाने के लिए उपयोग किया जाता है |

उपयोग एवं फायदे / Uses and Benefits

  • सर्दी, खांसी, या बुखार से छुटकारा पाने के लिए ईस लेमन ग्रास के तेल का उपयोग किया जाता है |
  • इसका उपयोग कई सारे रोगों को ठीक करने के लिए किया जा सकता है |
  • इसमे एक प्रकार का एंटी ऑक्साइड पाया जाता है, जो हमारे शरीर के लिए बहुत ही फायदेमन्द है |
  • पथरी रोग के इलाज मे इस लेमन के घास का उपयोग किया जा सकता है |
  • जोड़ो के दर्द तथा शरीर मे होने वाले अन्य दर्द से राहत पाने के लिए इस लेमन के घास से निकले तेल का उपयोग किया जा सकता है |

हमारे आस-पास इस तरह के और कई अन्य पेड़ पौधे हैं जिसके कई लाभ हैं जिसमे से सहजन का पेड़ भी है |

खेती / Lemongrass Farming

आम तौर पर इस लेमन ग्रास की खेती करने के लिए ज्यादा समस्या का सामना नहीं करना पड़ता है | इसे घर, बागानो या फिर खेतो मे भी उगाया जा सकता है | तो आइए जानते है की इस लेमन के घास को किस प्रकार से उगाया जाता है |

जलवायु:- इस लेमन की खेती करने के लिए गरम जलवायु का होना बहुत ही आवश्यक है, क्यूंकी यह गरम जलवायु वाले क्षेत्रों मे ही उगते हैं | इसे लगाने का सबसे बेहतर गरम जलवायु वाला माह मई के अंतिम से लेकर अगस्त के शुरुआत वाले  सप्ताह में होता है |

खेत की तैयारी:इसकी खेती करने के लिए सबसे पहले खेत की तैयारी ठीक प्रकार से करनी चाहिए | इसे बोने के लिए खेत मे सबसे पहले गोबर या जैविक खाद का छिडकाव करना चाहिए | गोबर का छिडकाव करने के बाद खेत की जुतायी ठीक प्रकार से करनी चाहिए तथा मिट्टी को ठीक प्रकार से भुरभुरी बना दे |

बीज की बुवाई:- इसके बीज की बुवाई करने के लिए ज्यादा समस्या का सामना करने की जरुरत नहीं होती है | इसके बीज को बोने से 1 या 2 दिन पहले उसे भिगोकर रखदे ताकि बीज ठीक प्रकार से अंकुरने के लिए तैयार हो जाए | बीज के अंकुरने के अगले दिन उसे बोने के समय एक बार खेत की जुताई करके बीज की बुवाई करदे |

पौधे की रोपाई:- बीज को बोने के लगभग 1.5 से 2 महीने के अंतराल में पौधे लगाने योग्य हो जाते हैं |  उसके बाद उन्हें लगाने के लिए खेत में गोबर डालकर जुताई करके लगाने से पौधे जलदी विकसित होता है | पौधे को लगाने के लिए 5 से 8 इंच के आस पास गड्ढे खोदकर उसमे पानी डालकर मिट्टी को गीली करने के बाद लगाने से पौधे के ठीक प्रकार से लगने का अनुमान रहता है | उसके बाद उसी विधि से अगले पौधे को लगाने के लिए लगभग 1 मीटर के आस पास की दूरी में लगाएं क्यूंकि यह पौधा बड़ा होकर फैलता है |

पानी:- पौधे को लगाने के बाद उसमे पानी ठीक प्रकार से आवश्यकता अनुसार डाले ताकि पौधे ठीक से लग जाए | उसके बाद इसकी खेती करने के लिए पानी की आवश्यकता काफी मात्रा में होती है, तो इसमें कभी भी पानी की कमी न होने दे वरना पौधा सुख सकता है | इसमें सुबह शाम पानी जरुरत के अनुसार से डालते रहे |

खाद एवं उर्वरक:- यह एक औषधीय पौधा है, इसलिए इसमें ज्यादा रासायनिक उर्वरक डालना सही नहीं हो सकता है | इस पौधे को लगाने लगभग 1 से 2 सप्ताह बाद उसमे पशुवों के गोबर को डाले ताकि पौधा ठीक प्रकार से विकसित हो सके | उसके बाद उसमे कभी कभी कम मात्रा में उर्वरक भी डाला जा सकता है |

फसल की कटाई:- पौधे के रोपाई करने के लगभग 5 से 6 महीने बाद फसल तैयार हो जाते हैं, इसलिए उसके बाद इसकी कटाई भी करनी आवश्यक होती है | इसकी कटाई करने के लिए इसके जड़ के हल्के ऊपर से काटे तथा इसके इधर-उधर फैले हुए जड़ को भी काट कर निकालले | इसे काटने के बाद इसे फिर से वैसाही छोड़ दिया जा सकता है, क्यूंकि यह फिर से उसी जड़ में उग सकता है |

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