लाजवंती का पौधा – Touch Me Not Plant/Flower In Hindi

By | December 29, 2019

यह लाजवंती का एक झाड़ीदार पौधा है, जो “छुई-मुई” के नाम से भी जाना जाता है | यह किसी भी इन्सान के छूने से सिकुड़ जाती है, फिर थोड़ी देर बाद ये अपने आप खुल जाते हैं | यह Fabaceae परिवार से सम्बंधित एक पौधा है, जिसका वैज्ञानिक नाम Mimosa pudica है | परन्तु क्या आप जानते हैं की, यह लाजवंती का पौधा किस प्रकार का होता है, इसके गुण कौन से हैं, यह कहाँ पाया जाता है, इत्यादि |

Touch Me Not Plant Information in Hindi

तो चलिए जानते हैं, इस लाजवंती पौधे के बारे में की, यह किस प्रकार का पौधा है, इसके गुण कौन से हैं, तथा यह कहाँ पाया जाता है, इत्यादि |

English Name: Touch me not
Hindi Name:
लाजवंती / छुईमुई
Scientific Name:
Mimosa pudica
Family:
Fabaceae

लाजवंती का परिचय / Introduction of Touch Me Not Plant

यह लाजवंती लम्बे समय तक रहने वाला एक बारहमासी पौधे के रूप में मौजूद है | इसे एक प्रकार से फैलने वाली या रेंगेने वाली छोटी झाडी के नाम से भी जाना जाता है, जो अपनी तेजी गति से बढ़ने के लिए ज्यादा जाना जाता है | यह आमतौर पर लगभग 15-50 सेंटीमीटर लंबा होता है, लेकिन अन्य पौधों की मदद से यह लगभग 1 मीटर या उससे अधिक ऊंचाई प्राप्त कर सकता है | यह पौधा छाया सहने योग्य नहीं है, और मुख्य रूप से कम पोषक तत्वों की सांद्रता वाली मिट्टी पर पाया जाता है | यह प्रजाति मुख्य रूप से दक्षिण अमेरिका तथा मध्य अमेरिका का मूल निवासी है, परन्तु अब यह एक उष्णकटिबंधीय जंगली घास के रूप में है, जो दक्षिणी संयुक्त राज्य अमेरिका, दक्षिण एशिया, पूर्वी एशिया और दक्षिण अफ्रीका में भी पाया जा सकता है |

छुईमुई पौधे के बारे में ऐसा मन जाता है की, यह शाम के ढलने से कुछ समय पहले से अपनी पत्तियां बंद करनी शुरू कर देती है तथा सुबह होने से पहले अपनी पत्तियों की फिर से खोलने लगती हैं |

पत्तियां एवं फूल / Leaf and Flower

Touch me not plant flower lajwanti

इस पौधे की पत्तियां गहरे हरे रंग में एक पंक्ति से निकले हुए होते हैं, जो एक दुसरे के विपरीत भी उसी पंक्ति में निकले होते हैं | ये पत्तियां आम तौर पर 1 से 1.5 cm लम्बे होते हैं तथा लगभग 0.5 cm चौड़े होते हैं, जो इमली के पत्तियों से मिलते-जुलते हैं | इसकी शाखाएं काफी पतले होते हैं, जो हलके कठोर होते हैं | ये शाखाएं युवा पौधों में खड़ा होता है, लेकिन उम्र बढ़ने के साथ रेंगना या झुकना शुरू कर देते हैं | इस पौधे में बरसात के समय में एक सुनहरे से गुलाबी रंग के फूल खिलते हैं, जो पूरी तरह से खिले हुए होते हैं | इसमें कोरोला 2-2.3 मिमी लंबे तथा इसमें चार पुंकेसर होते हैं | ये फूल दिखने में बहुत ही खुबसूरत होते हैं, परन्तु ये थोड़े चुभने वाले भी होते हैं |

प्रजतियां / Varieties

  • Pigra तथा M. diplotricha var. भी इस लाजवंती पौधे की प्रजातियाँ हैं, जिनमे गुलाबी गोलाकार फूलों के गुच्छों का उत्पादन होता है और उनमें चुभन भी होती है | इन प्रजातियों को निचे दिए अंतरों द्वारा पहचाना जा सकता है |
  • Pigra: इस M. pigra प्रजति वाले इमानदार पौधे हैं, जो सीधा बढ़ने वाले एक बड़े झाड़ू के रूप में हैं | इन पौधों की शाखाएं 6 से 16 जोड़े के साथ बड़ी-बड़ी होते हैं | यह हलके बड़े फली (3-8 सेमी लंबा) का उत्पादन करते हैं, जिसमें 14-26 एक-बीज वाले खंड होते हैं |
  • Diplotricha var: यह एक सीधा सिकुड़ा हुआ या सीधा चढ़ने वाला पौधा होता है, जिसमें काफी शाखाएँ होती हैं | यह लगभग 1-3.5 सेंटीमीटर हलके छोटे फली का उत्पादन करते हैं, जिसमे जिसमें केवल 3-5 एक-बीज वाले खंड होते हैं |

जीवनकाल / Lifespan

आम तौर पर यह लाजवंती का पौधा 10 से 12 महीने के तक जीवित रह सकता है, इसलिए इससे बारहमासी पौधे के नाम से भी जाना जाता है | परन्तु अगर इसकी देख-भाल ठीक प्रकार से की जाए तो यह कम से कम 12 से 15 महीने तक जीवित आसानी से जीवित रह सकती है |

उपयोग एवं फायदे / Benefits of Touch Me Not Plant / Flower

इस लाजवंती पौधे का उपयोग जिन कारणों से किया जाता है, एवं इसमें पाए जाने वाले पोषक तत्व एवं औषधीय गुण, आदि निम्नलिखित प्रकार से दिए गए हैं |

Lajwanti flower and leaf touch me not

  • इसमें प्रमुख रूप से जीवाणुरोधी, एंटीवेनम, एंटीफर्टिलिटी, एंटीकॉन्वेलेंट, एंटीडिप्रेसेंट, एवं अन्य औषधीय गुण पाए जाते हैं, जो कई प्रकार के रोगों को ठीक करने के लिए उपचार के रूप में उपयोग किया जा सकता है |
  • इस लाजवंती पौधे का उपयोग मूत्रजननांगी विकारों को दूर करने के लिए एक औषधि के रूप में किया जा सकता है |
  • बवासीर जैसे रोगों को ठीक करने के लिए इसे औषधीय दावा के रूप में उपयोग किया जा सकता है |
  • पेचिश या इससे समबन्धित रोगों से छुटकारा पाने के लिए इसका उपयोग किया जा सकता है |
  • इसे औषधीय दावा के रूप में शरीर में होने वाली घावों पर भी लागू किया जा सकता है |

रोचक तथ्य / Interesting Facts

  • यह लाजवंती पौधा मनुष्य के छूने से अपनी पत्तियां बंद कर लेती है, इसलिए इसे शर्मीली पौधे के रूप में भी जाना जाता है |
  • इस पौधे में कई रोगों के इलाज के लिए जड़ी बूटियां भी पायी जाती है |
  • यह लाजवंती बड़े ही आसानी से हमें नजर आ सकती है |
  • ये पौधे आम तौर पर थोड़े पुराने होने के बाद लम्बे तो होते हैं, परन्तु खड़े नहीं रह पाते हैं |
  • इस पौधे के फूल जुलाई से सितम्बर के बीच में खिलते हैं, जो दिखने में बड़े ही सुन्दर होते हैं |

खेती / Farming

इस लाजवंती पौधे को इसके बीज की मदद से बड़े ही आसानी से उगाया जा सकता है | तो चलिए जानते हैं, की इस लाजवंती पौधे को किस प्रकार से उगाया जा सकता है |

तापमान: इस पौधे को उगाने की लिए इसे किसी ऐसे स्थान में रखें जहाँ पर सुबह-सुबह सूर्य की किरने बड़े ही आसानी से पौधे में पड़ सके | इसे 65 से 75 डिग्री फ़ारेनहाइट के बीच एक औसत कमरे के तापमान में बड़े ही आसानी से उगाया जा सकता है |

मिट्टी: इसके पौधे को लगाने के लिए अच्छी प्रकार से बहने वाली बालुई मिट्टी की आवश्यकता होती है, जो हलकी उपजाऊ हो | इसे अच्छी तरह से उगाने के लिए मिट्टी में हमेशा मियामित रूप से पानी डालते रहे |

बीज तैयार करना: इस पौधे के बीज को बोने के लिए अच्छी तरह से तैयार करने के लिए सबसे पहले बीज को पानी में भिगोदे, क्यूंकि यह बीज हल्का कठोर होता है | इसे पानी में अच्छी तरह से भीगने किए लिए कम से कम 24 घंटे छोड़ दे ताकि बीज अच्छी तरह से बोने योग्य हो जाए | उसके बाद उन बीजों को अच्छी तरह से किसी गमले में या अपने बागानों में बोदे तथा उसमे पाने भरपूर मात्रा में डाले |

छुईमुई पौधे की देखभाल / How to Take Care of Touch Me Not Plant

इस लाजवंती के बीज को बोने के बाद थोड़ी ही दिनों में वे अंकुरित होना शुरू कर देते हैं तथा धीरे-धीरे वे पौधे के रूप में बढ़ने लगते हैं | उसके बाद उन पौधों की निम्नलिखित प्रकार से देख-भाल की जा सकती है |

  • पौधे के बढ़ने के दौरान उन्हें धुप की आवशयकता होती है, इसलिए इन्हें रोजाना सुबह में धुप की किरने आने वाली स्थान में रखदे |
  • इनमे कभी पानी की कमी न होने दे अन्यथा पौधे की जड़ सूख सकते हैं या पौधे मर सकते हैं |
  • इन पौधों में प्रतिदिन इनके आवश्यकता अनुसार पानी डाले ताकि पौधे अच्छी तरह से विकसित हो सके |
  • कभी ऐसा भी हो सकता है की, पौधों में छोटे-छोटे कीट लगे और पौधे को खराब करने लगे ऐसे स्थिति में इसमें कीटनाशक दवा का छिडकाव किया जा सकता है |
  • पौधे के तैयार होने के दौरान इसकी पत्तियां या शाखाएँ अगर सड़ने या गलने लगती हैं तो, उन्हें हटा दिया जाना चाहिए |
  • अगर इसे एक सजावटी पौधे के रूप में उगा रहे हैं, तो समय-समय पर इसकी कटाई एवं छटाई भी कर सकते हैं |

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