Rhynchostylis Retusa in Hindi – कोपोऊ फूल की जानकारी

By | July 26, 2019

Kopou phul यानि की Rhynchostylis retusa (जिसे फोक्सटेल ऑर्किड भी कहा जाता है) एक विदेशी प्रस्फुटित आर्किड है, जो Vanda alliance से संबंधित है। इसके पुष्पक्रम एक लटकन रेसमे है, जिसमें 100 से भी ज्यादा गुलाबी व सफ़ेद धब्बेदार फूल खिलते हैं। यह वसंत ऋतु की शुरुआत में लोक नृत्य बिहू के दौरान असमिया महिलाओं द्वारा पहने गए बाल-आभूषण के रूप में उपयोग होता है। इस फूल को असम का साबसे लोकप्रिय फूल माना गया है और असम में हीं इसे “कोप्पू फुल” के रूप में जाना जाता है । इस फूल के सफेद, गुलाबी, बैंगनी रंग और मसालेदार खुशबू न केवल मनुष्यों को लुभाती है, बल्कि छिपकली, गिरगिट और सांप जैसे कई सरीसृपों को भी आकर्षित करती है जो इसके आसपास घोंसला बनाते हैं।

Rhynchostylis Retusa Flower Fox Tail Information in Hindi

Rhynchostylis Retusa Flower in Hindi = कोपोऊ फूल

इसे कई बार Foxtail Orchid के नाम से भी जाना जाता है |

कोपोऊ फूल के बारे में / About Rhynchostylis Retusa

Kopou फूल को प्रेम, प्रजनन और उत्साह का प्रतीक माना जाता है और यही कारण है की इसे पुष्पांजलि पारंपरिक असमिया विवाह जैसे कई समारोह में एक आवश्यक तत्व माना गया है । यह फूल इन देशो में आसानी से देखने को मिल जाता है:

  • भूटान
  • कंबोडिया
  • चीन (गुइझोउ, युन्नान)
  • भारत
  • इंडोनेशिया
  • लाओस
  • मलेशिया
  • म्यांमार
  • नेपाल
  • फिलीपींस
  • सिंगापुर
  • श्रीलंका
  • थाईलैंड
  • वियतनाम

भारत में यह पौधा  उत्तर-पूर्व, उड़ीसा और आंध्र प्रदेश में सबसे आम है। आंध्र प्रदेश में इस पौधे को तेलगु नाम “चिंतारनमू” से जाना जाता है। Rhychostylis retusa को भारत में अरुणाचल प्रदेश और असम के राज्य फूल के रूप में मान्यता भी प्राप्त हुई है ।

इस फूल की एक भारतीय पौराणिक कथाओं में भी उल्लेक किया गया है , कहा जाता है की  भगवान विष्णु जी ने माता पार्वती की खोज के लिए इस फूल की सुगंध का पता लगाया था   क्योंकि माता पार्वती अपनी चोटी पर इस फूल को लगाया करती थी । पौराणिक किताबों में यह भी कहा गया है कि अर्जुन के घोड़ों ने एक कुएं से पानी पिया था जिसमें यह फूल भिगोया हुआ था, इसलिए अर्जुन के घोड़े बहुत तेजी से चल सकते हैं।

कोपोऊ  पौधा

Kopou Phool

Kopou फूल का पौधा लगभग 3 से 10 फीट तक होता है | पर आमतौर पर यह पेड़ के शाखा में  उगने वाला एक पौधा है जो की ऊंचाई तक खुले जंगलों में या वन में हाशिये पर या पेड़ों की टहनियों पर उगता है  । इसे फूल का नाम फॉक्सटेल ऑर्किड  इसलिए पड़ा क्यूंकि यह देखने में लोमड़ी की पूंछ जैसा दिखता है।

मौसम

यह पौधा सर्दियों और शुरुआती वसंत में बहुत अच्छा पनपता है । वसंत के मौसम के दौरान कोप्पू फूल (फॉक्सटेल ऑर्किड) का एक दृश्य देखने के लिए असम के लोग बहुत हीं बेसबरी से इंतज़ार करते है । आमतौर पर यह फूल देर से वसंत ऋतु में आते हैं। 

कोपोऊ पौधे की देखभाल / How to Take care

  • इस पौधे को पूरे वर्ष नियमित रूप से पानी और उर्वरक के आवेदन की आवश्यकता होती है, लेकिन ध्यान रहे की अधिक समय तक यदि इसके पत्ते गीले रहे तो वे मर जायेंगे ।
  • यह अप्रत्यक्ष प्रकाश व्यवस्था को प्राथमिकता देता है।
  • इस फूल का जीवन काल लगभग एक महीने का होता है ।

कोपोऊ फूल से जुडी रोचक जानकारी / Interesting Facts

  • कोप्पू फूल भारत, बांग्लादेश, बेनिन, बर्मा, कंबोडिया, चीन, इंडोनेशिया, लोआस, मलेशिया, नेपाल, फिलीपींस, सिंगापुर, श्रीलंका, थाईलैंड और वियतनाम में पाया जाने वाला वनस्पति है।
  • भारत में अदिकतर उत्तर-पूर्व प्रदेश पाया जाता है
  • कोप्पू फूल वसंत ऋतु के प्रारम्भ होने पर खिलते है जो बहुत सुन्दर और आकर्षक होते है, यह लाछेदार लम्बे रूप में उगते है |
  • कोप्पू फूल को फॉक्सटेल ऑर्किड डव फ्लावर के नाम से भी जाना जाता है | इसका वैज्ञानिक नाम राइनोकोस्टीलिस रेटुसा है |
  • कोप्पू फूल भारत के असम और अरुणाचल प्रदेश का राज पुष्प के रूप में मान्यता प्राप्त है।
  • कोप्पू फूल बसंत ऋतू के आरंभ में खिलते है, इसे युवतियां अपने बालों पर सजावट के रूप में कोप्पू फूल का माला लगाती है इसे बिहू नर्तकी की पोशाक का एक अभिन्न अंग मन जाता है ।
  • युवाओं के लिये आर्किड को प्यार और स्नेह का प्रतीक माना जाता है।
  • कोप्पू फूल के पौधे प्रत्यक्ष सूर्य के प्रकाश में अच्छी तरह से नहीं उगते हैं, कम सूर्य के प्रकाश में अच्छी तरह पनपते हैं।
  • कोप्पू के पुष्प बेलनाकार रूप में लगते है इसके पौधे लगभग 60 सेंटीमीटर तक लम्बे है |

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