कनेर के फूल से जुडी जानकारी – Kaner Flower Information in Hindi

By | September 26, 2019

कनेर हमारे भारत देश में पाए जाने वाला एक फूल है, जो पूरे लगभग सभी स्थानों में पाया जाता है | इसे Oleander flower के नाम से भी जाना जाता है | यह आसानी से पाए जाना वाला फूल है जिसका उपयोग पूजा में भी किया जाता है | यह फूल पीले रंग का होता है, जो दिखने में काफी सुन्दर होता है | इसके अलावे इस कनेर को सजावटी पौधे के तौर पर भी की जाती है | कनेर का पौधा भारत देश के अलावे मोरक्को, पुर्तगाल, चीन आदि देशों में आसानी से पाया जाता है |

Kaner Flower information in Hindi

Scientific Name: Oleander flower
English Name:
Kaner Flower
Family:
Apocynaceae

परिचय / Introduction

यह कनेर का फूल एक ऐसा फूल है जिसकी पेड़ छोटी ऊँचाई वाली होती है | यह फूल जब पेड़ में खिलता है, तब पेड़ बहुत ही खूबसूरत लगता है | यह आसानी से बढ़ने वाला पौधा है | यह हर साल 1 से 2 feet तक बढ़ सकता है |

आम तौर पर इस कनेर फूल के पेड़ की लंबाई लगभग 2 से 6 मीटर होती है परन्तु अगर कभी-कभी यह 8 मीटर तक भी जा सकती है | इसके अलावे यह कनेर का पेड़ 20-30 years तक जीवित रह सकता है | इस कनेर के फूल से कई प्रकार के रोगों का इलाज भी किया जाता है |

प्रजाति / Varieties

इस कनेर के 4 प्रजातियां पाई जाती हैं, जो कुछ इस प्रकार से दिए गए हैं |

  • सफ़ेद कनेर (White Kaner)
  • लाल कनेर (Red Kaner)
  • पीला कनेर (Yellow Kaner)
  • गुलाबी कनेर (Pink Kaner)

पत्तियाँ / Leaf

Yellow color Kaner flower with leaf

इस पेड़ की पत्तियां लगभग 4 से 6 इंच लम्बी होती है तथा 1 इंच चौड़ी होती है, जिसके बीच में एक रेखा खिची हुई होती है | यह बिल्कुल गहरे हरे रंग में होती है और इसकी ऊपर की सतह मुलायम होती है परन्तु निचे की सतह खुदरे जैसी होती है | इन पत्तियों को तोड़ने या इन्हें खुरचने पर इनसे एक प्रकार का दूध निकलता है, जो मनुष्यों के लिए हानिकारक हो सकता है |

  • छोटे बच्चो को इस पौधे से दूर रखना चाहिए |
  • अगर कोई इसे खा ले तो उलटी, डायरिया और चक्कर आ सकती है |

कनेर का फूल / Flower

कनेर के पेड़ की फूल सफ़ेद, लाल, पीला, तथा गुलाबी जैसे चार प्रकार के रंगों में पायी जाती है, जो दिखने में बहुत ही खूबसूरत लगती है | इस फूल के निचे की सतह हल्के नुकीले जैसी तथा ऊपर की सतह गोलकार आकर में खुली होती है, जिससे फूल और भी खूबसूरत लगता है | ये गर्मियों के मौसम में कनेर के पत्तियों से पहले खिलते हैं | जब ये फूल खिलकर तैयार हो जाते हैं, तब पूरे पेड़ में एक अलग सी चमक आ जाती है |

इस तरह के और भी कई सुन्दर फूल है जैसे Daisy Flower और Balsam Plant and Flower जिससे जुडी जानकारी आप यहाँ से प्राप्त कर सकते हैं |

फल / Fruits

इस कनेर का फल कच्चे में बाहर से दिखने में गहरे हरे रंग का होता है और बाद में यह गहरे काले तथा लाल रंग का हो जाता है | यह जहरीला होता है, जो मनुष्यों के लिए हानिकारक भी हो सकता है | यह फल एक बीज वाला होता है |

बीज / Seeds

यह कनेर का बीज बहुत ही कठोर होता है, जो भूरे रंग का छोटे आकर में होता है | यह बीच में मोटा तथा दोनों तरफ से नुकीले जैसे गोलाकार आकार में होता है | यह एक प्रकार से जहर है, अगर इसका सेवन मनुष्य करे तो इससे उसकी जान भी जा सकती है |

उपयोग एवं फायदे / Uses and Benefits of Kaner Flower

Oleander kaner flower

  • कनेर के पत्तियों और फूलों का इस्तेमाल मलेरिया रोग के उपचार के इलाज के लिए किया जाता है |
  • इसके जड़ का उपयोग कर पाउडर बनाकर बवासीर और अल्सर जैसे रोगों के इलाज के लिए एक बेहतरीन बाहरी इलाज है |
  • इस पेड़ की पत्तियों तथा छाल को कीटनाशक, यानि चूहे को मारने के लिए जहर के रूप में भी उपयोग किया जा सकता है |
  • चर्म रोग जैसे रोग को भी ठीक करने के लिए इस कनेर का उपयोग कर सकते हैं |
  • यह कनेर लकवा मारने की समस्या को ठीक करने में मदद करता है |
  • यह सुन्दर सा कनेर एक सजावटी पेड़ के रूप में भी उपयोग किया जा सकता है |

कनेर के पौधे की देखभाल कैसे करे / How to Take Care Oleander flower

वैसे तो आम तौर पर इस प्रकार के फूल की देख भाल करने में समस्या नहीं होती है | इसे लगाने के लिए सबसे पहले इसे ऐसे स्थान में लगाएं जहाँ पर पानी तथा धुप आसानी से जा सके | मिट्टी को ठीक तरीके से खोद-कर उसमे पौधे को लगाएं तथा लगाने के बाद उसमे ठीक तरीके से सुबह शाम पानी देते रहें |

इसे लगाने के बाद इसे छावं वाली जगह पर बिल्कुल न रखें बल्कि ऐसे स्थान पार रखें जहां धुप ठीक प्रकार से मिलती हो | लगाने के थोड़े समय बाद उसमे ध्यान देते रहें उसे दिन भर धुप लगे ऐसे स्थान पर न रखें | कनेर के पौधे को लगाने का सबसे अच्छा समय शाम का वक्त होता है |

जब पौधा हल्का बड़ा हो जाए तो उसे सहारा देने के लिए किसी लकड़ी को उसके साथ बांध दे ताकि पौधा सही सलामत बढ़ते जाए | पौधा बढ़ने के कुछ समय बाद जब उसमे पत्तियां के साथ साथ फूल भी आने लगे तो उसमे फिर मेहनत करने की जरुरत नहीं पड़ती है, वह खुद ही तैयार हो जाता है |

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