Curry Tree Information in Hindi – करी का पेड़ और पत्ते से जुडी जानकारी

By | October 26, 2019

करी का पेड़ भारत देश का मूल प्रवाशी है, जो की अन्य कई प्रदेशों में भी पाया जाता है | इसकी पत्तियां आम तौर पर किसी न किसी कार्य में लगभग सभी घरों में उपयोग की जाती है | इस कढ़ी के पत्तियां से कई तरह के आयुर्वेदिक दवाइयाँ भी बनायीं जाती है, जो हमारे स्वास्थ्य के लिए लाभकारी हो सकता है | कढ़ी के पत्ते को कुछ लोग मीठा नीम के नाम से भी जानते हैं, क्यूंकि इसकी पत्तियां नीम की पत्ती की तरह दिखती है |

Curry ka pedh or Tree

तो आइये आज इस करी के पेड़ और पत्ते के बारे में कुछ बाते जानते हैं जैसे :- यह किस प्रकार का पेड़ है, इसके पत्ते के गुण, कढ़ी के पेड़ को कैसे लगाये, इसकी देखभाल कैसे करें आदि |

  • Scientific Name: Murraya koenigii
  • English Name: Curry tree
  • Family: Rutaceae
  • Species: koenigii

इस कढ़ी पत्ते के पेड़ को और भी बहुत सारे नामों से जाना जाता है जिनमें कुछ निम्नलिखित प्रकार से दिए गए हैं :

  • Karipata
  • Bergera koenigii
  • Murraya koenigii
  • South India soapnut
  • Sweet nim
  • Curry leaf

करी  पेड़/ About करी Tree:

यह एक सदाबहार पेड़ होता है | कन्नड़ भाषा में इस करी पेड़ को काला नीम भी कहा जाता है | यह पेड़ ज्यादा बड़ा नहीं होता है, इस कढ़ी पत्ते का ऊँचाई लगभग 3 से 5 मीटर के आस-पास होता है तथा लगभग 45 से 50 सेंटीमीटर व्यास इसकी तनें होता हैं | कढ़ी पेड़ के हर टहनी में लगभग 12 से 22 के आसपास की पत्तियाँ खिली होती हैं | इस पेड़ का एक बहुत ही खूबसूरत भाग है, जो छोटी-छोटी सादे  रंग में और अच्छे खुशबू वाली फूल है | इस पेड़ की फल बड़े ही कमाल की होती है जो की काले रंग के चमकीले-चमकीले होते हैं जिसे खाया जा सकता है | वैसे तो यह पेड़ कही भी लगाया जा सकता मगर यह हिमालय के क्षेत्र, आसाम तथा चटगाँव जैसे जगहों में ज्यादा में पाए जाने वाले पेड़ है |

करी का पत्ता/ Curry Leaf

Curry ka patta or Leaf

आम तौर पर कढ़ी की पत्तियां छोटे और लंबे तथा पतले और अंडाकार आकर में होते हैं | यह नीम की पत्तियों की तरह नुकीली भी होती हैं और इस पत्ते की लंबाई लगभग 2 से 4 सेंटीमीटर तथा 1 से 2 सेंटीमीटर चौडाई होती है | ये हमेशा गहरे हरे रंग में तीखी सुगंध के साथ पाए जाने वाली पतियों वाला पेड़ है |

करी का फूल/ Curry Flowers

इस करी  पेड़ के फूल आम तौर पर दिखने में हल्के हल्के पीले सफ़ेद रंगों में होते हैं | ये फूल बहुत ही छोटे होते हैं, जो खिलने के बाद काफी अच्छे लगते हैं | इन फूलों को रगड़ने के बाद इसमें से एक प्रकार कढ़ी की खुशबू होती है |

करी का फल/ Curry Fruits

कढ़ी के पेड़ में उगने वाले फल जब उगता है, तो दिखने में छोटे जामुन की तरह होता है | ये फले पेड़ में एक साथ उगते हैं, जिसमे आम तौर पर लगभग 40 से 60 छोटे फल होते हैं | ये फले पकने के बाद चमकदार तथा बैगनी रंगों में होते हैं |

जीवनकाल/ Lifespan

इस करी के पेड़ की औसत जीवनकाल लगभग 45 से 50 वर्ष तक हो सकती है, परन्तु अगर इस पेड़ की देख-भाल ठीक प्रकार से की जाए तो यह और भी कुछ समय तक जीवित रह सकता है |

उपयोग/ Uses & Benefits of Curry

वैसे तो आम तौर पर इस कढ़ी के पत्ते का इस्तेमाल कढ़ी बनाने में काम आता है तथा इससे और भी अन्य कई प्रकार के भोजन को बनाने में किया जाता है | इस कढ़ी पत्ते का उपयोग कई प्रकार के बिमारियों में इलाज के लिए किया जा सकता है |

करी पत्ते का भोजन बनाने में उपयोग

  • इस कढ़ी पत्तियां का उपयोग कढ़ी या करी वाले स्वादिष्ट व्यंजन को बनाने में किया जाता है |
  • इसका उपयोग श्रीलंका तथा दक्षिण भारत में दाल को छौंका लगाने में भी किया जाता है |
  • इस कढ़ी पत्ते का उपयोग कई तरह के सब्जियां बनाने में किया जा सकता है |
  • इसका उपयोग थोरण, वड़ा, रसम और करीजैसे व्यंजनों को बनाने में किया जाता है |
  • इस पत्ते का उपयोग सबसे ज्यादा रसेदार भोजन को बनाने के लिए किया जाता है |

हमारे देश में इस तरह के कई और लाभदायक पेड़ पाए जाते हैं जैसे काजू का पेड़, जामुन का पेड़, बबूल का पेड़ आदि |

कढ़ी पत्ते के चिकित्सक फायदे

Curry tree flowers

  • अगर 4 से 5 करी पत्ते का सेवन अगर रोजाना सुबह में खजूर के साथ करे तो इससे शरीर में हुए खून की कमी को दूर करता है |
  • इस कढ़ी पत्ते का जूस निकालकर शुद्ध देशी घी,चीनी तथा काली मिर्ची को पीसकर और फिर सबको एक साथ मिलाकर हल्का उबालकर पीने से लीवर मजबूत होती है |
  • रोजाना सुबह में उठकर अगर इस करी पत्ते का उपयोग करे तो यह शुगर को नियंत्रित रखने में बेहद मदद करता है |
  • अगर वजन कम करने के लिए डाइटिंग कर रहे हैं फिर भी वजन ठीक से नहीं कम हो पा रही है, तो सुबह-सुबह इसका सेवन करने से यह काफी मदद करता है |
  • आपको बतादे की इस कढ़ी के पत्ते में एंटी फंगल गुण पाए जाते हैं, जिससे यह त्वचा से जुडी समस्याएं को दूर करने में काफी मदद करता है |
  • इस करी के पत्ते में काफी मात्रा में vitamin B2, B6 तथा B9 पाए जाते हैं जो हमारे लिए बहुत ही फायदेमंद हो सकता है |
  • इसका इस्तेमाल करने से इसमें पाए जाने वाले एंटीऑक्सीडेंट से यह घाव, जला हुवा तथा कटा-फटा आदि को ठीक करने में काफी मदद करेगा |
  • अगर रोजाना सुबह-सुबह 6 से 7 पत्तियाँ का सेवन किया जाये तो इससे आँख की रौशनी तेज हो सकती है |+

इस तरह के और कई फायदेमंद पेड़ो के नाम आप यहाँ प्राप्त कर सकते हैं |

करी पेड़ की खेती/ Farming of Curry Tree

वैसे तो आम तौर पर देखा जाता है की इस कढ़ी के पेड़ को लगाने में ज्यादा परेशानी नहीं होती है, जल्द से जल्द पौधे को उपजाने के लिए सबसे पहले :-

  • इसे लगाने के लिए सबसे बेहतरीन जलवायु गर्मी तथा बरसात के बिच वाला मौसम होता है |
  • इस कढ़ी के पौधे को अगर आप अपने घरों में या घर के आस-पास लगाना चाहते हैं, तो इसे ऐसे स्थान में लगाए जहां पर सूरज की रौशनी आसानी से आती हो |
  • इस पौधे को जल्द से जल्द उपजाने के लिए सबसे पहले बरसात के मौसम में ताजे बीजो को गीली मिट्टी में बोये |
  • बीज को बोने के कुछ दिनों बाद कढ़ी के छोटे-छोटे पौधे निकलने शुरू हो जाते हैं तथा उन पौधों में जब ठीक प्रकार से कढ़ी की पत्तियां आ जाए तो उसमे पानी जरुरत के अनुसार ही देना अन्यथा जड़ सड़ सकता है |
  • इसके पौधों को रोपने के लिए सबसे पहले भूमी तैयार को तैयार करने के लिए खेतो में जुताई की जाती है तथा उसके बाद गड्ढे करके पौधों की रोपाई की जाती है |
  • पौधे को बढ़ने के दौरान उसे पानी की भी बहुत जरुरत होती है, इसलिए कम ही मात्रा में लेकिन पानी रोजाना 2 से 3 वक़्त जरूर डाले |
  • पौधे को हल्का बढ़ने के बाद उसमे प्रत्येक सप्ताह हल्का-हल्का उर्वरक तथा जैविक कीटनाशक दवा इससे पौधे को किसी प्रकार की कीड़े नहीं खाएँगे और अच्छी तरह से बढ़ सके |
  • आम तौर पर इस कढ़ी के पौधे को बढ़ने के लिए लगभग 2 से 3 वर्ष का समय लग ही जाता है, उसके बाद वह पेड़ बनने के लिए ठीक प्रकार से तैयार हो जाता है |

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