Costus Plant Information in Hindi – फायदे और खेती की जानकारी

By | November 13, 2019

यह कोस्ट्स हल्दी से सम्बंधित एक जड़ी बूटियों वाला खूबसूरत पौधा है | आम तौर पर ये पौधे गरम जलवायु में जीवित रहने वाले पौधे हैं, जो अधिक ठण्ड बर्दाश्त नहीं कर पाते हैं | यह पौधा बारह महीने रहने वाला पौधा है, इसलिए इसे बारहमासी पौधा भी कहा जा सकता है | इसमें कई औषधीय तत्त्व पाए जाते हैं, जो हमारे स्वास्थ्य के लिए काफी लाभकारी हो सकते हैं | लेकिन क्या आप जानते हैं की, यह कोस्ट्स कहाँ पाया जाता है, इसके गुण कौन से हैं तथा इसे किस प्रकार से उगाया जाता है |

Costus Plant

तो आइये जानते हैं की, यह कोस्ट्स का प्लांट किस प्रकार से उपयोग में लाया जा सकता है तथा इसकी खेती किस प्रकार से की जाती है |

English Name: Costus
Hindi Name:
कुठ (Kuth)
Scientific Name:
Saussurea costus
Family:
Costaceae

परिचय / Introduction

यह Costaceae परिवार से सम्बंधित एक पौधा है, जिसमे कई प्रकार के औषधीय गुण पाए जाते हैं | इसकी ऊँचाई लगभग 2 से 3 मीटर के आस-पास हो सकती है, जो समय के बढ़ने के साथ खिलते रहते हैं | ये पौधे उपोष्णकटिबंधीय से उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में उगने वाले पौधे होते हैं | इस पौधे का वैज्ञानिक नाम Saussurea costus है, जो मूल रूप से भारत का प्रजाति है | इस पौधे के तेल से कई औषधीय दवाइयां तथा परफ्यूम बनायी जाती है, जो हमारे लिए लाभदायक है |

पत्तियां / Leaf

इसके पत्तियां गहरे हरे रंग के साथ चिकनी होती है तथा इसके नीचे की परत हल्की बैंगनी छाया जैसी होती है | ये पत्तियां मुलायम होने के साथ-साथ हल्के लंबे भी होते हैं | इसके अलावे इन पत्तियों के आगे का भाग हल्के नुकीले आकार में निकला होता है |

फूल / Flower

इसके फूल लाल रंग के पंखुड़ियों के साथ खिले होते हैं, जिसके पंखुड़ियों के बीच दो पीले रंग के ट्यूब निकले होते हैं | वैसे तो यह फूल ज्यादा बड़ा नहीं होता है, परन्तु हल्का लंबा तथा आकर्षित होता है | इसके प्रत्येक पौधे में इसके फूल खिले हुए पाए जाते हैं | ये फूल दिखने में बहुत ही मनमोहक तथा खूबसूरत होते हैं |

इस तरह के लाल रंग के कई और फूल पाए जाते हैं जैसे ट्यूलिप फूल, Gardenia Flower, गुड़हल इत्यादि जिसे आप अपने बागान में लगा सकते हैं |

उपयोग एवं फायदे / Uses and Benefits of Costus

Costus flowerवैसे तो इस कोस्ट्स के पौधे का उपयोग मुख्य रूप से इससे तेल निकालकर कुदरती परफ्यूम बनाने के लिए किया जाता है, जिसकी खूबसूरत काफी अच्छी होती है |

  • अस्थमा रोग से सम्बंधित परेशानियों से छुटकारा पाने के लिए इस कोस्ट्स के जड़ का उपयोग कर सकते हैं |
  • आंत में होने वाली गंभीर बिमारी जैसी समस्या को रोकने के लिए इस कोस्ट्स का इस्तेमाल करना आवश्यक है |
  • जोड़ो में होने वाले दर्द तथा शरीर में होने वाली अन्य दर्द को ठीक करने के लिए इसके तेल का उपयोग किया जाता है |
  • पेट में होने वाली गैस की समस्या से छुटकारा पाने के लिए इसके तेल का उपयोग किया जा सकता है |
  • इसमें एंटी ओक्सिडेंट के घटकों भी पाए जाते हैं जैसे:- β- कैरोटीन, एस्कॉर्बिक एसिड (विटामिन सी), टोकोफ़ेरॉल (विटामिन) आदि |
  • त्वचा रोग से सम्बंधित परेशानियों से छुटकारा पाने के लिए इसका उपयोग एक औषधीय दवा के रूप में किया जा सकता है |
  • इसका उपयोग अनेक रोगों को रोकने के लिए तरह-तरह की दवाइयां बनाने के लिए की जाती है |
  • निमेटोड्स जैसे खतरनाक संक्रमंक रोग के इलाज में इस कोस्ट्स का उपयोग किया जा सकता है |

पोषक तत्व:

इस कोस्ट्स के पौधे में पाए जाने वाले पोषक तत्व हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत ही लाभकारी हो सकते हैं, जो निम्नलिखित प्रकार से दिए गए हैं |

  • कार्बोहाइड्रेट
  • स्टार्च
  • एमाइलोज
  • प्रोटीन
  • लिपिड
  • विटामिन ए

खेती / Farming

इस पौधे को उगने के लिए गर्म क्षेत्र की आवश्यकता होती है तथा आम तौर तो इसे उगाने के लिए ज्यादा मुसीबतों का सामना नहीं करना पड़ता है | परन्तु इसकी खेती करने में बस थोड़ी मेहनत करने के आवश्यकता होती है | तो आइये जानते हैं, की कोस्ट्स के पौधे की खेती किस प्रकार से की जाती है |

Costus plant farming

भूमी: इसे लगाने के लिए सबसे पहले अच्छे तथा दोमट मिट्टी वाली उपजाऊ भूमी की आवश्यकता होगी | इसे लगाने के लिए हमेशा ध्यान रखें की एक बार मिट्टी की जांच जरूर करले की उसका ph मान 6.8 से लेकर 7.0 तक के आस-पास होनी चाहिए |

जलवायु: इस पौधे को गरम जलवायु वाले क्षेत्रों में उगाने से यह काफी बेहतर तरीके से तथा अपने समय पर भी उगता है | इसके अलावे इसे नर्म जलवायु वाले क्षेत्रों में भी उगाया जा सकता है, परन्तु थोड़ी कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है |

खेत की तैयारी:इसे लगाने के लिए सबसे पहले सही तरीके से खेत में सारे तैयारियां कर लेनी चाहिए | इसे लगाने के लिए लगभग 10 से 15 kg गोबर का छिडकाव अपने पूरे खेत में करने के बाद 2 से 3 दिनों तक छोड़ दे | उसके बाद उसमे ठीक प्रकार से जुताई करवाएं तथा मिट्टी को ठीक प्रकार से भुरभुरी जैसी करवादे | उसके बाद खेत से निकलने वाले पत्थरों को ठीक प्रकार से हटा दे अन्यथा पौधे को नुकसान पंहुचा सकती है |

कोस्ट्स की रोपाई:- इसे लगाने के लिए लगभग 5 से 7 इंच गड्ढा खोदकर लगाएं तथा हर एक कोस्ट्स की दूरी लगभग 6 से 10 इंच के अन्तराल में होनी चाहिए | उसके बाद उसे आप एक साथ हल्दी के जैसे लगा सकते हैं | इसे लगाने के बाद दोनों तरफ की मिट्टी को उठाकर उन्हें ढक दे | इससे पौधे में पानी आने के रास्ते भी बन जाएँगे |

पानी:- इसे लगाने के दुसरे दिनसे इसमें पानी देना शुरू करे तथा एक बार पानी देने के बाद इसमें 3 से 4 दिनों के बाद दे | उसके बाद जब इसका पौधे धीरे धीरे उगने लगे इसमें पानी रोजाना आवश्यकता अनुसार डालने का प्रयास करे | जब तक पौधा बड़ा नहीं हो जाता तब तक उसमे पानी उसके जरुरत के अनुसार डालते रहे |

खाद एवं उर्वरक:- कोस्ट्स को लगाने के दौरान इसमें गोबर के डालने के बाद उसमे थोड़े खाद का भी छिडकाव करना चाहिए, इससे पौधा किसी भी तरह से खराब नहीं होगा | पौधे के उगने के लगभग 15 दिनों बाद उसमे एक बार सिंचाई करने के बाद खाद डाल दे ताकि पौधा सही तरीके से उग सके | एक बार खाद डालने के लगभग 1 महीने के अन्तराल में इसमें फिर से खाद डाले तथा उसके बाद खाद डालना बंद करदे अन्यथा पौधा खराब भी हो सकता है |

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