Brahma Kamal Plant and Flower in Hindi – ब्रहमा फूल की जानकारी

By | July 12, 2019

Brahma Kamal जो की एक प्रकार का कमल फूल होता है सृष्टि के देवता ब्रह्मा के नाम पर यह  कमल पूरे वर्ष में केवल एक रात के लिए हीं खिलता है वो भी जुलाई और सितंबर के बीच में । वैसे तो यह फूल साल में एक बार खिलता है लेकिन कभी कभी ये फूल खिलने में कई साल भी लगा देता है । इसे आमतौर पर नाइट blooming Cereus, रात की रानी, लेडी ऑफ द नाईट के रूप में जाना जाता है।

Brahma kamal flower

प्रजातियाँ / Varieties

वज्ञानिको के मुताबिक इस फूल के लगभग 31 प्रजातियाँ बताये गए है । लेकिन इसका original फूल हिमालय के लगभग १७ हज़ार fit की ऊँचाइयों पर पाया जाता है । कहा जाता है की हिमालय के पास रहने वाले चारागाह इस फूल को तोड़ कर मंदिरों में दे देते है ।

उपयोग

ब्रह्म कमल एक औषधीय जड़ी बूटी है। पौधे को तिब्बती चिकित्सा में एक जड़ी बूटी माना जाता है। इसका स्वाद कड़वा थोडा होता है। पूरे पौधे का उपयोग किया जाता है।

यह ब्रह्म कमल का पौधा अक्सर घरों में खिड़की की पाल पर उगता हुआ देखा जाता है। यह ब्रह्म कमल का फूल उत्तराखंड का राज्य पुष्प कहलाता है। भारत देश में इस कमल के फूल को एक पवित्र पौधे के रूप में माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि यह सौभाग्य और समृद्धि का भार लेकर आता है और जिस भी घर में या फूल खिलता हैं वह बहुत शुभ और भाग्यशाली होता है।

ब्रह्म कमल का फूल

Brahma kamal plant and flower

इस फूल सफ़ेद रंग का होता है और यह स्टार के जैसा खिलता है । यह फूल  सुंदर सुगंध के साथ अपने परागणकों को चंद्रमा या तारा प्रकाश द्वारा खिलने में मदद करते हैं। सूर्यास्त के बाद लगभग रात के 7 बजे से यह फूल खिलना शुरू होता है और पूरी तरह से खिलने में लगभग घंटा 2 लगाता है , यह फूल 8 घंटे तक रात भर बाहर खुले में रहता है ।

उत्तराखंड में, ब्रह्म कमल केदारनाथ, फूलों की घाटी, हेमकुंड साहिब और तुंगनाथ इन तीनो क्षेत्रों में पाया जाता है। इन तीर्थ स्थानों के मंदिरों में इसी कमल की फूल को भगवान् की प्रतिमाओं पर चढ़ाए जाते हैं । ब्रह्मा कमल की नई कली कला के एक छोटे टुकड़े की तरह दिखती है। इस ब्रह्मा कमल की कली की वृद्धि एक पत्ती के किनारे से देखी जाती है।

उगाने का तरीका

ब्रह्म कमल कैक्टस का एक प्रकार है, इसे बहुत अधिक पानी की आवश्यकता नहीं होती है। जब तक आप वास्तव में सूखी जगह पर न हों तब तक आपको दो से तीन दिनों में एक बार पानी देना चाहिए।

कभी भी इस पौधे को पानी में न डालें क्योंकि अधिक पानी से पौधा मर जाएगा । इसके पौधे को तेज धूप वाले स्थान पर हीं लगाए । कोशिश करें कि पत्तियों को पानी न दें, मिट्टी को ही पानी दें। ओवरवेटिंग से बचें क्योंकि इससे जड़ें सड़ सकती हैं। कोशिश करे सुबह 8 से 10 बजे के बीच हीं पौधे को पानी दें। इसके पौधे को किसी बंद कमरे में या फिर किसी अंधेरे कमरे में ना रखे ।

ब्रह्मा कमल से जुडी कुछ रोचक जानकारियां

  • यह लोकप्रिय रूप से ऑर्किड कैक्टस के रूप से भी जाना जाता है क्योकि फूल में सुन्दरता आर्किड जैसे होते है , जो की कैक्टस के सामान होते है |
  • यह फूल हिमालय की वादियों में पाया जाता है, और इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है की यह चौदह वर्ष में सिर्फ एक बार ही खिलता है |
  • इसे स्वयं सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा जी का पुष्प भी माना जाता है।
  • हिमालय की ऊंचाइयों पर मिलने वाला यह पुष्प अपना पौराणिक महत्व भी रखता है।
  • इस फूल के विषय में यह माना जाता है कि यह पुष्प मनुष्य की इच्छाओं को पूर्ण करता है।
  • यह कमल सफेद रंग का होता है जो वाकई में आकर्षक दिखता है |
  • इसका उल्लेख कई पौराणिक कहानियों में भी किया गया  है।
  • इस कमल से संबंधित एक बहुत ही प्रचलित मान्यता कहती है ,कि जो भी व्यक्ति इस फूल को देख लेता है, उसकी हर इच्छा पूर्ण होती है ।
  • इसे खिलते हुए देखना भी आसान नहीं है, क्योंकि यह देर रात में खिलता है और केवल कुछ ही घंटों तक रहता है |
  • इसका वैज्ञानिक नाम साउसिव्यूरिया ओबलावालाटा (Saussurea obvallata) है।  यह ब्रह्मकमल एस्टेरेसी कुल का पौधा है  |
  • इसके नजदीकी रिश्तेदार में कुछ पुष्प हैं जो कुछ इस प्रकार है :- सूर्यमुखी, गेंदा, गोभी, डहलिया, कुसुम एवं भृंगराज जो इसी कुल के अन्य प्रमुख पौधे हैं।

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