Banyan Tree Information in Hindi – बरगद का पेड़

By | April 7, 2019

Banyan यानि की बरगद का पेड़ एक बहुत हीं व्यापक शाखाओं वाला विशाल पेड़ होता है। यह पेड़ भारत का राष्ट्रीय वृक्ष भी कहलाता है। इस पेड़ को सन 1950 में भारत के राष्ट्रीय वृक्ष का दर्जा दिया गया था। बरगद एक ऐसा वृक्ष है जिसे लगभग पुरे देश में पाए जाता हैं। इस पेड़ को बरगद, बोर, बेर, पेद्दा मारी, नयाग्रोध, बार, बड़, वटनाम, बहूपाड़ा, आदि कई नामो से जाना जाता है। कहा जाता है कि एक समय में 10,000 से भी अधिक लोग एक बार में इसकी छाया के नीचे बैठ सकते हैं ।

इस पेड़ ने अपना नाम “बनिया” या “भारतीय व्यापारियों” से प्राप्त किया था जो इस पेड़ की छाँव के नीचे बैठा करते थे । यह वृक्ष भारत के अलावा पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे tropical and sub-tropical भागों में भी पाया जाता हैं। यह पेड़ विश्व में सबसे विशाल वृक्षों का प्रतिनिधित्व करता हैं।

Banyan Tree - Bargad ka Ped se judi jankari

परिचय / Introduction

Banyan tree लगभग 21 meter से भी अधिक की ऊंचाई तक बढ़ता है । आमतौर पर यह एक पौधे के रूप में दूसरे पौधे पर उगकर अपना जीवन शुरू करता है। “बरगद” का अर्थ आमतौर पर भारतीय बरगद या फिकस बेंगालेंसिस होता है। यह पेड़ एक स्थानीय द्विबीज दली व सपुष्पक पेड़ कहलाता है। इसके लकड़ी का उपयोग कई चीजो को बनाने में लाया जाता है जैसे की कर्ब, डोर पैनल, बॉक्स, फर्नीचर आदि ।

धार्मिक महत्व / Ritual Importance

हिंदू धर्मो के मुताबिक इस पेड़ को “वट वृक्ष” के रूप महत्व दिया गया है । यही नहीं बरगद के पेड़ को ब्रह्मा, विष्णु, महेश की त्रिमूर्ति के जैसा हीं महत्व दिया जाता है । हिन्दुओ में कई शादी सुदा  महिलाएं वट सावित्री पूजा के दिन इस वृक्ष की पूजा करती है ।

बरगद का जड़ / Banyan Tree’s Root

Banyan Tree Root

बरगद के पेड़ की कई सारे हवाई यानि की हेवा में लहराते हुए जड़ें होते हैं । बरगद की जड़ें एक विशाल सिलेंडर जैसी बनाती हैं, और यह पूरी तरह से खड़ी होती है। इसकी शाखाओं से निकलने वाली जड़े हवा में लहराते हुए धीरे धीरे की ओर बढ़ती जाती है और फिर जमीन के अंदर घुस जाती हैं । इस पेड़ के इन्ही जड़ों का नाम ‘बरोह’ या फिर ‘प्राप’ जड़ होता है । एक बार जब जड़ें जमीन पर पहुंच जाती हैं, तो वे पोषक तत्वों को चूसते हुए और भी तेजी से मोटी और मजबूत हो जाती हैं। बरगद के ताने भी सीधे और कठोर होते है।

बरगद के पत्ते / Leaf of Banyan Tree

Leaf of Banyan Tree

बरगद के पेड़ के पत्ते बड़े बड़े , मोटे चमड़े वाले , चमकदार , हरे और अण्डा के अकार के होते है । इसके पत्ते 10 से लेकर 20 cm तक लम्बे होते हैं । अधिकांश अंजीर के पेड़ों की तरह इस पेड़ के  पत्तियों की कली दो बड़े पैमानों से ढकी हुई होती है । इसके युवा पत्तियों में एक आकर्षक लाल रंग होता है। इसके पत्ते को तोड़ने पर इससे सफेद दूधिया तरल पदार्थ निकलता है जिसे “लेटेक्स अम्ल” कहते है।

फल / Fruit

बरगद के पेड़ के फल छोटे व गोल अकार के एवं लाल रंग के होते है। इसके अन्दर बीज भी पाई जाती है । इसकी बीज बहुत हीं छोटी होती है।

बरगद के पद की आयु / Lifespan

आपको जान कर हैरानी हो सकती है की एक Banyan Tree की औसत आयु (lifespan) 200 से 300 years तक हो सकती है | इस तरह के कई और पेड़ हैं जैसे की Oak tree  जो की लगभग 600 years तक जीवित रह सकते हैं |

बरगद के पेड़ के बारे में रोचक तथ्य / Interesting Facts of Banyan Tree in Hindi

  • कई स्थानों पर बरगद के पेड़ की लकडियों और छालो का इस्तेमाल कागज बनाने के लिए किया जाता है।
  • भारत में बरगद के पत्तो का use plate के रूप में किया जाता है।
  • इस पेड़ को भूमि संरक्षण के लिए लगाई जाती है।
  • बरगद का सबसे पुराना पेड़ भारत के कोल्कता में पाया गया है जिसे “ग्रेट बरगद” के नाम से जाना जाता है । इस पेड़ को २५० साल से भी अधिक पुराना बताया जाता है ।
  • एक और बरगद का पेड़ बैंगलोर में पाया गया है जो की लगभग 2 एकड़ ज़मीन में फैला हुआ है।

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